देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के तहत उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न स्थानीय उत्पादों और राखियों का अवलोकन करने के साथ प्रदेश के सभी जिलों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी महिलाओं से संवाद भी किया।मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पहले ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ शुरू किया जाएगा और इसे पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय और व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिला समूहों के उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला है। महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ खेती, पशुपालन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अब वे अपने हुनर और उद्यमशीलता के बल पर सफल उद्यमी के रूप में भी पहचान बना रही हैं।उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को बाजार, उचित मूल्य और नई पहचान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 95 विकासखंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए, जिनसे करीब 12.50 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई।प्रदेश में 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हो रहे हैं, जिनसे 5.20 लाख से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हैं। इन समूहों के सहयोग के लिए 8 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन भी कार्य कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूहों के उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए प्रदेश में 49 ग्रोथ सेंटर, 17 सरस सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और आठ बेकरी यूनिट स्थापित की गई हैं। यात्रा मार्गों पर 110 बिक्री केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। स्थायी बिक्री केंद्रों और राज्य स्तरीय सरस मेलों के माध्यम से उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। अब ‘सशक्त बहना उत्सव’ का विस्तार कर इसे ‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे महिला समूहों के उत्पादों को पर्यटन स्थलों, धार्मिक यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और होटल-रिसॉर्ट तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना मातृशक्ति के परिश्रम और हुनर को सम्मान देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी स्टॉलों से खरीदारी कर महिला समूहों को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल भुगतान और विपणन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।इस अवसर पर विभिन्न जिलों से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। महिलाओं ने कहा कि सरकार की पहल से उनके उत्पादों को बाजार और पहचान मिलने के साथ आय के नए अवसर भी बढ़े हैं।कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव झरना कमठान, अनुराधा पाल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह सहित विभिन्न जिलों के मुख्य विकास अधिकारी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
