देहरादून, एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष एवं पद्मश्री प्रो. बी.के.एस. संजय ने कहा कि आधुनिकता का अर्थ अपनी परंपराओं को भूल जाना नहीं है। आज तकनीक और डिजिटल दुनिया तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है, ऐसे में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत को संरक्षित रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी है। वह आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर आधारित लोक-जनजातीय कला प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कला केवल चित्रों और कलाकृतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जड़ों, परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ने का माध्यम है। चमनलाल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य के भीतर चल रहे द्वंद्व, तनाव और भावनाओं को अभिव्यक्ति देने का सशक्त माध्यम है। कला और साहित्य मनुष्य को संवेदनशील बनाते हैं और उसके भीतर संतुलन पैदा करते हैं।
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