

इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)देहरादून: मॉनसून की बारिश ने उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आम जिंदगी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। मुख्य सड़क मार्गों से दूरी, बारिश की वजह से सड़क बंद होने की वजह से महंगाई बढ़ गई है। कुछ गांवों में तो इस समय एक गैस सिलेंडर के लिए दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। चीनी,नमक समेत खाद्यान्न भी बंद सड़कों की इन गांवों में महंगा पड़ रहा है। ऐसी दिक्कतें सीमांत जनपद चमोली,पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के दूर दराज के इलाकों में हो रही है,जहां सड़कें लगातार बंद चल रही हैं।चमोली जिले की दूरस्थ निजमूला घाटी के पाणा,गौणा,ईरानी की सड़क 43 दिन से बंद है। यहां गैस सिलेंडर,खाद्यान्न समेत जरूरी सामान की सप्लाई घोड़े-खच्चरों से की जा रही है। ईरानी के पूर्व ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी बताते हैं कि पगना गांव तक पहले ही भाड़ा लगाकर गैस सिलेंडर 1200 रुपये का पड़ता था,लेकिन अब सड़क टूटने की वजह से दूरी बढ़ गई है,तो घोड़े-खच्चर वाले भी गैस सिलेंडर के छह सौ रुपये अतिरिक्त ले रहे हैं। इससे 942 रुपये के गैस सिलेंडर के लिए उन्हें दो हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं।आपातकालीन स्थिति में बढ़ जाती मुसीबतइन गांवों में जरूरी सामान के लिए ज्यादा कीमत चुकाने की स्थिति तो पैदा हुई है, इससे ज्यादा मुश्किल आपातकालीन स्थिति में होती है। बीमारी में मामूली सी दवाई के लिए टूटे रास्तों से गुजर कर जाना पड़ता है। ऐसे में कई बार घोड़े-खच्चर वाले मददगार बनते हैं।पहले से रख रहे हैं स्टॉकउत्तराखंड के ऐसे दूरस्थ गांवों में ग्रामीण बरसात से पहले ही खाद्यान्न का स्टॉक घरों में कर लेते हैं, लेकिन गैस सिलेंडर से लेकर चीनी, नमक, तेल जैसी दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुएं अगर सीजन के बीच में खत्म हो जाए तो फिर उन्हें इसके लिए तय माल भाड़े से दोगुनी रकम खर्च करनी पड़ती है।यह है दूरस्थ इलाकों की स्थितिपिथौरागढ़,चमोली,उत्तरकाशी,टिहरी समेत उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कई गांव इतनी दूर हैं कि उनके सामने खाद्यान्न से लेकर दूसरे जरूरी सामान के लिए काफी ज्यादा माल भाड़ा चुकाना पड़ता है। इन दूरस्थ इलाकों के कई गांवों में रसोई गैस सप्लाई की व्यवस्था नहीं है।
