इस खबर को शेयर करेंदेहरादून। वाहनों की आयु सीमा तय करने के अधिकार पर रोक के कारण उत्तराखंड परिवहन विभाग वाहनों की मॉडल सीमा लागू करने जा रहा है। इसके तहत वाहनों को दिए जाने वाले रूट परमिट की अधिकतम आयु तय होगी। परमिट अवधि पूरी हो जाने के बाद वाहन मालिक को उस रूट से वाहन को हटा लेना होगा। संबंधित वाहन के लिए दूसरे रूट के लिए आवेदन किया जा सकेगा। राज्य में खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों की रोकथाम के लिए यह किया जा रहा है।
राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) के निर्देश पर गठित पठोई समिति वाहन मॉडल सीमा को अंतिम रूप दे रही है। गुरुवार को संपर्क करने पर उपायुक्त परिवहन दिनेश पठोई ने बताया कि एसटीए की अगली बैठक से पहले पहले इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। मालूम हो कि एक अक्टूबर को एसटीए बैठक में भी इसका प्रस्ताव आया था। एसटीए अध्यक्ष बृजेश कुमार संत ने इसे विस्तृत रूप से तैयार करने के निर्देश दिए थे।
वहीं, पूर्व में परिवहन विभाग को वाहन की आयु सीमा तय करने का अधिकार प्राप्त था। इसके डीजल चालित ऑटो की आयु सीमा 10 साल और पेट्रोल चालित की आयु सीमा 12 साल तय थी। डीजल से चलने वाले वाहन को सात साल और पेट्रोल चालित वाहन को 10 साल बाद हर छह छह महीने अपनी जांच करानी अनिवार्य थी। वर्ष 2018 में कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी।
यह है प्रस्ताव
● स्टेज कैरिज में किसी एक मार्ग के लिए दिए गए परमिट के लिए मैदानी रूट पर परमिट की मॉडल सीमा 18 साल और पर्वतीय रूट पर 15 साल की जाएगी। यह मानक विभिन्न मार्गों के समूह के लिए दिए जाने वाले परमिट की आयु सीमा भी यही रहेगी।
● कांट्रेक्ट कैरिज : किसी भी आरटीओ रीजन में 25 से 40 किलोमीटर परिधि में चलने वाले वाहनों के लिए शहरी क्षेत्र मॉडल सीमा 10 साल और ग्रामीण क्षेत्र में 12 साल रहेगी।
● किसी मार्ग विशेष के लिए जारी प्राइवेट सेवा वाहन के लिए मैदानी रूट पर मॉडल सीमा 18 साल और पर्वतीय रूट पर 15 साल रहेगी। राज्य स्तरीय परमिट पर यह माडल सीमा केवल 15 साल रहेगी।
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