
देहरादून, ग्राफिक एरा अब नासा व इसरो के संयुक्त मिशन निसार से जुड़ गया है। अपनी भागीदारी से ग्राफिक एरा जलवायु परिवर्तन व आपदाओं से निपटने की इस ऐतिहासिक पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नासा- इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार सैटेलाइट मिशन (निसार) के तहत ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के गणेशपुर स्थित फार्म में हाई प्रिसीजन कार्नर रिफ्लेक्टर स्थापित किया गया। यह रिफ्लेक्टर निसार से एकत्रित किए गए डाटा के जियोमेट्रिक व रेडियो मैट्रिक कैलिब्रेशन में मदद करेगा। इससे मिलने वाली तस्वीरें पहले से ज्यादा सटीक व उच्च रेजोल्यूशन वाली होंगी। ग्राफिक एरा के विशेषज्ञ डॉ. ऋषि प्रकाश ने कहा कि निसार मिशन पृथ्वी की सतह पर होने वाले परिवर्तनों की निगरानी रखने में सहायक होगा। ग्राफिक एरा के फार्म में लगाया गया रिफ्लेक्टर प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी देने के साथ ही फसलों का प्रबंधन, मिट्टी की नमी जांचने, जंगलों की आग जैसी ज्वलंत समस्याओं से निपटने में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि निसार से मिलने वाला डाटा पृथ्वी पर प्राकृतिक और मानवीय गतिविधियों से होने वाले परिवर्तनों की निगरानी और प्रबंधन के तरीकों में सुधार करेगा।
नासा- इसरो का संयुक्त उपग्रह मिशन, निसार अपनी तरह का पहला मिशन है। आईआईटी कानपुर व आईआईटी पटना के बाद ग्राफिक एरा इसका हिस्सा बनने वाली देश की एकमात्र यूनिवर्सिटी है। रिफ्लेक्टर को ग्राफिक एरा के डिपार्टमेंट ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. ऋषि प्रकाश व डॉ. अनुराग विद्यार्थी के नेतृत्व में आईआईटी कानपुर के नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी के सहयोग से स्थापित किया गया।
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