

Is Nainital going to be submerged in hell? The devastation of 1880 is coming! Will everything be destroyed?इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sandeep Chaudhary (see all)नैनीताल: उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन नैनीताल अब एक अदृश्य लेकिन खतरनाक संकट की चपेट में आ गया है. शहर के नीचे चूहों द्वारा बनाई गई सुरंगें अब यहां की जमीन को खोखला कर रही हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि अगर हल्का सा भूकंप भी आया तो पूरा शहर तबाही की कगार पर पहुंच सकता है.शहर के कई हिस्सों में चूहों ने इस कदर सुरंगें बना दी हैं कि जमीन धंसने लगी है. सड़कें दरक रही हैं और पहाड़ी इलाकों में बने घरों की नींव हिलने लगी है. शेर का डांडा, लडियाकांटा, सात नंबर आयारपाटा और मुख्य बाजार के इलाकों में ये खतरा सबसे ज्यादा नजर आ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब डर सताने लगा है कि कहीं कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए.पहले भी भुगत चुका है नैनीताल ऐसा झटकाइतिहास गवाह है कि नैनीताल कितना संवेदनशील है. दअरसल, साल 1880 में भूकंप के झटके से पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिसमें 151 लोगों की जान चली गई थी. इसके बावजूद उस पहाड़ी पर निर्माण कार्य होता रहा और अब हालात फिर सेबढ़ती चूहों की आबादी बनी मुसीबत शहर में जगह-जगह फेंके जा रहे खाने-पीने के सामान ने चूहों की तादाद बढ़ा दी है. ये चूहे अब पूरे शहर के नीचे सुरंगें बनाकर उसकी नींव को खोखला कर रहे हैं. ये सिर्फ जमीन धंसाव तक सीमित नहीं है, बल्कि चूहों के ज़रिए प्लेग जैसी बीमारियों का खतरा भी अब मंडराने लगा है.प्रशासन के पास नहीं है कोई ठोस योजनाइतना गंभीर मामला सामने आने के बावजूद प्रशासन के पास इन चूहों से निपटने की कोई ठोस योजना नहीं है. न तो कोई रोकथाम की पहल दिख रही है और न ही शहर के लोगों को राहत देने की कोई तैयारी. स्थानीय लोग इस लापरवाही को लेकर नाराज़ हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द कार्य योजना की मांग कर रहे हैं.अगर समय रहते इस संकट को नहीं रोका गया, तो नैनीताल की खूबसूरती को बरकरार रखना मुश्किल हो जाएगा. एक छोटा सा झटका भी इस हिल स्टेशन को बड़ी तबाही की तरफ ले जा सकता है.
