

देहरादून। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग अब प्रदेश के 13 संवेदनशील ग्लेशियरों के साथ ही सभी ग्लेशियर व हिमक्षेत्रों का सेटेलाइट सर्वे कराएगा। इसमें उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक), इसरो के साथ मिलकर इन क्षेत्रों में आ रहे बदलावों के बारे में अध्ययन किया जाएगा। प्रदेश में धराली में आई आपदा के बीच एक बड़ा कारण इस क्षेत्र के ग्लेशियरों से मलबे के आने को भी माना जा रहा है। वर्ष 2013 में केदारनाथ में आई आपदा भी ग्लेशियर टूटने के कारण आई थी। इसके साथ ही कई अन्य स्थानों पर भी ग्लेशियरों के टूटने की घटनाएं सामने आई हैं।
इसके दृष्टिगत इन ग्लेशियरों के विस्तृत अध्ययन की बात सामने आई। कुछ समय पहले यूसैक ने वाडिया के साथ मिलकर प्रदेश के संवेदनशील 13 ग्लेशियर का सर्वे कर इसकी रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी थी। अब यूसैक इनके सेटेलाइट सर्वे की दिशा में कदम उठा रहा है। इसके तहत समय-समय पर सभी ग्लेशियरों के सेटेलाइट चित्र लिए जाएंगे।
इसके बाद इनमें आने वाले बदलावों का गहनता से अध्ययन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि कहीं ये भविष्य में किसी बड़ी आपदा का कारण न बनें। प्रदेश में वैसे तो 1400 से अधिक बड़े-छोटे ग्लेशियर हैं। ऐसे में इनका चरणबद्ध तरीके से सर्वे किया जाएगा। पहले चरण में 13 ग्लेशियरों का सेटेलाइट सर्वे किया जाएगा। इसके बाद अन्य ग्लेशियरों का भी सर्वे किया जाएगा। इसके बाद यह रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी जाएगी, ताकि वह इस आधार पर आवश्यक कदम उठा सके।
सचिव सूचना प्रौद्योगिकी नितेश झा ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से सभी ग्लेशियर का सेटेलाइट सर्वे किया जाएगा। उद्देश्य यह कि यदि इनमें कहीं कोई बदलाव नजर आता है तो उससे निपटने की ठोस कार्ययोजना बनाई जा सके।
इन जिलों में हैं 13 संवेदनशील ग्लेशियरचमोली – वसुधरा ताल समेत चार ग्लेशियर (तीन का अभी कोई नाम नहींं रखा गया है। )उत्तरकाशी- केदारतालबागेश्वर – नाग कुंडटिहरी गढ़वाल – मसूरी तालपिथौरागढ़- मबांग व प्यूंगरु समेत छह ग्लेशियर (चार का अभी कोई नाम नहींं रखा गया है। )
