

चमोली: देवभूमि उत्तराखंड में गुरुवार सुबह आसमान से कहर बरपा। चमोली जिले में बादल फटते ही नंदानगर और आसपास के इलाकों में भीषण बरसात शुरू हो गई। मलबे और पानी की धार ने कई घरों को बहा दिया, जिनमें से 6 पूरी तरह तबाह हो गए। पांच लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। यह केवल आपदा नहीं, बल्कि प्रकृति के सामने इंसान की असहायता का करुण दृश्य है।
प्रशासन ने राहत-बचाव दलों को तुरंत रवाना किया और NDRF, SDRF तथा पुलिस मौके पर पहुंच गई। दो लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है। अधिकारियों ने बताया कि कई पालतू जानवर भी बाढ़ के पानी में बह गए। पहाड़ों की गोद में बसे गांवों की चीख-पुकार ने पूरे राज्य को हिला दिया है। यह असहनीय है।
कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारीमौसम विभाग ने पहले ही उत्तराखंड के कई जिलों – देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी और हरिद्वार में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया था। चेतावनी के बावजूद पहाड़ी इलाकों में बर्बादी थमने का नाम नहीं ले रही। पहले जहां लोग मानसून को राहत मानते थे, आज वही मानसून उनके लिए डर का प्रतीक बन चुका है। पहले की बारिश बनाम आज का विनाश, यही असली तुलना है।
देहरादून की सहशस्त्रधारा में हाल ही में हुई बादल फटने की घटना का दर्द अभी ताजा ही था कि चमोली की यह त्रासदी सामने आ गई। लगातार घटनाओं ने पहाड़ की जनता को भयभीत कर दिया है। एक स्थानीय ने कहा, “पहाड़ का हर परिवार अब अलर्ट पर जी रहा है।” यह सभ्यता का पतन है जब लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते।
गांधी ने कहा था- “प्रकृति हर किसी की ज़रूरत पूरी कर सकती है, पर किसी का लालच नहीं।” लेकिन आज जो बर्बादी हम देख रहे हैं, वह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी विकास नीतियों और अंधाधुंध छेड़छाड़ का परिणाम भी है। यदि सरकार ने पहले ही ठोस कदम उठाए होते, तो शायद आज इतनी तबाही नहीं होती। चेतावनी अनसुनी करना तानाशाही सोच है। नदी किनारे बसे लोगों से प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
