
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पीसीएस मुख्य परीक्षा स्थगित होने के बाद आगे की कानूनी रणनीति को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रारंभिक परीक्षा के एक विवादित प्रश्न को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा परीक्षा पर रोक लगाए जाने के बाद आयोग अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। इस संबंध में आयोग ने अपनी लीगल सेल से विस्तृत राय मांगी है।
दरअसल, संयुक्त राज्य सिविल सेवा (प्रवर अधीनस्थ) परीक्षा 2025 की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी, लेकिन प्रीलिम्स में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर दर्ज आपत्तियों ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया। इन आपत्तियों के आधार पर चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने आयोग को सामान्य अध्ययन के एक गलत प्रश्न को हटाने और संशोधित प्रारंभिक परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नई मेरिट सूची तैयार करने के बाद ही मुख्य परीक्षा की आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
गौरतलब है कि मुख्य परीक्षा 6 से 9 दिसंबर के बीच आयोजित होनी थी, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने आधिकारिक रूप से परीक्षाएं फिलहाल रोक दी हैं। यह जानकारी आयोग ने अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित कर दी है। नई तिथियां मेरिट सूची संशोधित होने के बाद ही घोषित की जाएंगी।
हाईकोर्ट के निर्देश आने के बाद शुक्रवार को आयोग ने एक विस्तृत बैठक की, जिसमें भविष्य की रूपरेखा पर चर्चा हुई। आयोग के सचिव अशोक पांडे ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि आयोग सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है और कानूनी सुझाव मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक कदम उठाने के लिए आयोग पूरी तरह तैयार है।
फिलहाल उम्मीदवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि संशोधित परिणाम कब जारी होगा और मुख्य परीक्षा की नई तारीखें कब घोषित की जाएंगी, वहीं आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना भी अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो सकती है।
