

देहरादून: उत्तराखंड में इंसानों पर जंगली जानवरों के हमले लगातार हो रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर धामी सरकार ने वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट (सुरक्षा) सुविधा देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मुख्य रूप से उन ग्रामीण व वनवासी इलाकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है जहां तेंदुए, भालू, बाघ जैसे जंगली जानवरों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। इन क्षेत्रों में बच्चों का स्कूल आना-जाना खतरनाक हो गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान इससे जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इसी बैठक में उन्होंने पौड़ी के डीएफओ को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए हैं। ऐसा पौड़ी में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ रहे संघर्ष की घटनाओं के मद्देनजर किया गया है।
सीएम धामी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का अधिक आतंक है, वहां बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और घर तक लाने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन एस्कॉर्ट की व्यवस्था करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तियों के आस पास जंगली झाडियों को अभियान चलाकर साफ किया जाए। इसके अलावा बच्चों और महिलाओं को वन्य जीवों से होने वाले खतरों को लेकर जागरूक किया जाए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की सूचना मिलने के 30 मिनट के अंदर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचे। इसके लिए संबंधित डीएफओ और रेंजर की जिम्मेदारी तय की जाए साथ ही प्रभावितों को आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा अगर मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी परिवार से कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग प्रभावित परिवार की आजीविका को सहायता देने के लिए दो सप्ताह के अंदर नीति बनाकर दें।
