
देहरादून । केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने की तैयारी को लेकर देशभर में सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने से जुड़े बिल के पेश होते ही राजनीतिक हलकों में हंगामा शुरू हो गया है। इस बिल की गूंज अब उत्तराखंड की राजनीति में भी साफ सुनाई देने लगी है।
बिल को लेकर विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमला कर रही हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
हरीश रावत ने कहा कि श्रीरामचंद्र जी को ऐसे किसी नामकरण की कोई आवश्यकता नहीं है, जिसके लिए किसी भक्त का नाम हटाना पड़े। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी श्रीराम के परम भक्त थे, लेकिन सरकार ने प्रभु के नाम का इस्तेमाल कर भक्त का नाम हटाने का काम किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इससे गरीबों से जुड़ी इस योजना की मूल भावना और आत्मा को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में बीजेपी राम से लक्ष्मण और हनुमान के नाम भी हटा देगी।
मनरेगा के नाम बदलने को लेकर उठे इस राजनीतिक विवाद के बाद उत्तराखंड की सियासत भी गर्मा गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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