
सिडकुल इलाके में एक कारखाने में नौकरी करने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते से साइबर अपराधियों ने दस लाख रुपये की चोरी कर ली। यह धनराशि पीड़ित ने अपने आवास निर्माण के लिए बैंक से आवासीय ऋण के तौर पर प्राप्त की थी। घटना की रिपोर्ट पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके जांच प्रारंभ कर दी है।
रामपुर मार्ग पर शिवाशीष कॉलोनी में रहने वाले पंकज कुमार ने स्थानीय पुलिस थाने में अपनी शिकायत में कहा कि 16 नवंबर को उनके फोन पर आरटीओ नोटिस से जुड़ा एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें एक कड़ी संलग्न थी। जैसे ही उन्होंने उस कड़ी पर क्लिक किया, उनके डिवाइस से स्वचालित रूप से सहेजे गए नंबरों पर मैसेज भेजे जाने लगे और फोन अचानक बंद पड़ गया।
कुछ देर बाद फोन सामान्य हो गया, लेकिन शाम के समय उनके फोन पर बैंक से दो किस्तों में कुल दस लाख रुपये निकासी के अलर्ट आए। व्यथित पंकज ने फौरन बैंक से बात की, जहां उन्हें सूचित किया गया कि राशि किसी अन्य खाते में स्थानांतरित हो चुकी है।
साइबर सहायता लाइन 1930 पर संपर्क किया, त्वरित मदद नहीं मिली
पीड़ित ने कहा कि ठगी की जानकारी मिलते ही उन्होंने साइबर सहायता नंबर 1930 पर दो बार फोन किया, लेकिन कोई तत्काल सहायता नहीं प्रदान की गई। इसके पश्चात उन्होंने साइबर यूनिट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और एचडीएफसी बैंक की स्थानीय शाखा को भी घटना से अवगत कराया।
पंकज ने बताया कि यह पूरी राशि उन्होंने अपने घर के निर्माण कार्य के लिए आवासीय ऋण के रूप में ली थी, जिसे अपराधियों ने कुछ ही क्षणों में हड़प लिया। उन्होंने पुलिस से चुराई गई राशि की वसूली की अपील की है।
एपीके ऐप्स से सावधान रहें
पुलिस अधिकारियों ने जनता को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर अपराधी अब एपीके ऐप्स और नकली कड़ियों के माध्यम से लोगों को शिकार बना रहे हैं। यदि फोन पर किसी अपरिचित स्रोत से एपीके ऐप या कड़ी प्राप्त हो तो उसे कभी न खोलें।
आरटीओ से संबंधित जानकारी केवल टेक्स्ट संदेश के जरिए प्रदान की जाती है, किसी कड़ी या फाइल के माध्यम से नहीं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज कत्याल ने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जिस खाते में धनराशि हस्तांतरित हुई है, उसकी विवरण संकलित किए जा रहे हैं। जांच प्रक्रिया जारी है।
