
अल्मोड़ा स्थित पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में जन औषधि केंद्र लंबे समय से बिना वैध अनुमति के कार्यरत पाया गया। इस अनियमितता का पता तब चला जब जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने अचानक चिकित्सालय का दौरा किया। साथ ही, उन्होंने स्वच्छता संबंधी कमियों पर असंतोष जताते हुए गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने के लिए कहा।
चिकित्सालय की चिकित्सा सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए डीएम अंशुल सिंह वहां पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जन औषधि केंद्र की अनुमति अवधि समाप्त हो चुकी है। जब तक राज्य सरकार से नई मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इस केंद्र का प्रबंधन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक की देखरेख में किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचा जा सके।
इसके अलावा, चिकित्सालय में स्वच्छता की कमी पाई गई। इस पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक को आदेश दिए गए कि शौचालयों की निरंतर और उचित सफाई सुनिश्चित की जाए। परिसर में कचरा फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। डीएम ने उल्लेख किया कि चिकित्सालय में विभिन्न प्रकार की जांचें होती हैं और दूर-दराज से मरीज इलाज के लिए आते हैं। जांच रिपोर्ट में देरी से लोगों को असुविधा होती है, जिसके कारण उन्हें दोबारा आना पड़ता है। इसलिए, शीघ्र ही एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी कि रिपोर्ट सीधे मरीजों के मोबाइल पर प्राप्त हो सके।
निरीक्षण के समय डीएम ने दवा वितरण कक्ष, जन औषधि केंद्र, भंडार रजिस्टर, दवाओं की उपलब्धता, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे तथा पैथोलॉजी प्रयोगशाला की संचालन प्रक्रिया की भी समीक्षा की। जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने उपलब्ध दवाओं की नवीनतम सूची तुरंत उपलब्ध कराने और दवाओं की आपूर्ति में किसी भी स्तर पर लापरवाही न करने के कड़े निर्देश जारी किए। इस मौके पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक एचसी गड़कोटी को चिकित्सालय की समस्त स्वास्थ्य सेवाओं को निर्धारित मापदंडों के अनुसार, सुव्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से संचालित करने के लिए निर्देशित किया गया।
