
कुख्यात गैंगस्टर विनय त्यागी की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या ने उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ पुलिस इस हमले को पुरानी रंजिश और गैंगवॉर का नतीजा बता रही है, वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामले में पुलिस और माफिया के गठजोड़ की चर्चाएं जोरों पर हैं। खासतौर पर उत्तराखंड पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जिसके तार गाजियाबाद के एक प्रभावशाली बिल्डर से जुड़े होने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बिल्डर सफेदपोश छवि वाला है और उसने विनय त्यागी की मदद से एक कॉलोनी की 30 करोड़ रुपये की जमीन महज 11 करोड़ में खरीदी थी। इस सौदे में अनियमितताओं की वजह से विवाद गहराया था। बिल्डर ने विनय की पत्नी को अपनी कंपनी में डायरेक्टर बनाया हुआ था, जबकि विनय त्यागी ने भी उस कॉलोनी में करोड़ों रुपये का निवेश किया था। जांच में अब तक विनय त्यागी, बिल्डर और उत्तराखंड पुलिस के उस अधिकारी की कड़ी आपस में जुड़ती दिख रही है।
यदि पकड़े गए शूटरों का कनेक्शन इस बिल्डर या पुलिस अधिकारी से स्थापित हो जाता है, तो हत्याकांड का असली मकसद सामने आ सकता है। सूत्र बताते हैं कि लैंड डील में हुए भारी नुकसान और निवेश की रकम वापसी को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि माफिया और पुलिस के कुछ तत्वों के बीच गठजोड़ बन गया। पुलिस कस्टडी में दिनदहाड़े हुए इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, लेकिन इसके पीछे का आर्थिक षड्यंत्र और पुलिस-माफिया नेक्सस इस केस को और जटिल बना रहा है।
पुलिस ने हमलावरों को गिरफ्तार कर पुरानी दुश्मनी का हवाला दिया है, लेकिन परिवार और सूत्रों का दावा है कि यह साजिश गहरी है। यदि जांच इस एंगल से आगे बढ़ी, तो उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
