
देहरादून। आईसीआईसीआई बैंक की जाखन शाखा में तैनात एक कर्मचारी पर बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक ने ग्राहकों से धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगाया है। आरोपी कर्मचारी ग्राहकों को म्यूचुअल फंड और उच्च रिटर्न वाली योजनाओं में निवेश का प्रलोभन देकर उनकी राशि हड़पता था। बैंक की आंतरिक जांच में अब तक आठ ग्राहकों से 31 लाख 71 हजार रुपये से अधिक की ठगी का पता चला है। पुलिस ने शिकायत पर राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक रितेश श्रीवास्तव ने राजपुर पुलिस थाने में दी गई शिकायत में बताया कि आरोपी राजेश रंजन, जो डांडा लखोंदवाला का निवासी है, जाखन शाखा में कार्यरत था। वह शाखा में आने वाले ग्राहकों को अधिक लाभ की योजनाओं का लालच देकर निवेश के लिए राशि लेता था। ग्राहक बैंक कर्मचारी होने के कारण उस पर विश्वास कर राशि सौंप देते थे, लेकिन आरोपी निवेश करने की बजाय उस राशि को विभिन्न तरीकों से अपने खातों में स्थानांतरित कर लेता था।
यह मामला 15 जुलाई 2025 को उस समय सामने आया जब एक ग्राहक गीता पासवान बैंक पहुंचीं और उनके खाते से चार लाख रुपये की अनधिकृत निकासी की शिकायत की। इसके कुछ दिनों बाद एक अन्य ग्राहक अजीत ने भी अपने खाते से तीन लाख रुपये गायब होने की जानकारी दी।
बैंक द्वारा की गई आंतरिक जांच में पता चला कि आरोपी ने कुल आठ ग्राहकों को निशाना बनाया और उनसे 31 लाख 71 हजार रुपये की ठगी की। जांच में आरोपी की चालाकी का तरीका भी उजागर हुआ। उदाहरण के लिए, गीता पासवान की राशि को आरटीजीएस के माध्यम से अपने मित्र प्रांशु के खाते में ट्रांसफर किया और फिर उसे अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते में मंगवा लिया। कई मामलों में ग्राहकों के चेक से नकदी निकालकर अपने खाते में जमा की गई। एक ग्राहक गुरु प्रसाद के प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट कार्ड से फोन पे पर रेंटल के नाम पर लगभग सवा तीन लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए गए।
गौरतलब है कि इस शिकायत से पहले बैंक के पूर्व अधिकारी वैभव गोयल ने 7 अगस्त 2025 को ही राजपुर थाने में आवेदन देकर ठगी की पूरी जानकारी दी थी, लेकिन तब मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। लगभग चार महीने बाद क्षेत्रीय प्रबंधक की नई तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई की।
थाना प्रभारी ने क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत के आधार पर आरोपी राजेश रंजन के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गहन जांच जारी है।
