
पिछले दिनों कानपुर के स्टांप एवं पंजीकरण विभाग में अरबों रुपये की धोखाधड़ी उजागर होने के बाद अब आयकर विभाग की जांच का दायरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के विभिन्न जिलों तक फैल गया है।
गुप्त पड़ताल से पता चला है कि पंजीकरण प्रक्रिया की ओट में इन क्षेत्रों में लंबे समय से व्यवस्थित रूप से अरबों रुपये की हेराफेरी की जा रही है। इस धांधली में गलत तथा随意 पैन कार्ड का उपयोग करके संपत्ति लेन-देन को दर्शाया गया, जिसकी वजह से आयकर विभाग को भारी राजस्व हानि हुई है। सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग ने गाजियाबाद,
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल 56 पंजीकरण केंद्र जांच के घेरे में हैं। नोएडा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, देहरादून सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में व्यापक स्तर पर अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मिले हैं। संपत्ति मूल्य को जानबूझकर कम आंकने, नकदी लेन-देन को छुपाने तथा दस्तावेजों में छेड़छाड़ के गंभीर लक्षण पाए गए हैं। अधिकारी बताते हैं कि यह अनियमितता किसी एक जिले तक नहीं सिमटी, बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क के जरिए वर्षों से चल रही है। कानपुर
और आगरा के पंजीकरण कार्यालयों में हालिया आयकर छानबीन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। केवल कानपुर में ही स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के जोन एक और दो में अब तक लगभग 3,500 करोड़ रुपये की विसंगतियां सामने आई हैं। इनमें नकली पैन कार्ड, कम मूल्यांकन तथा संदेहास्पद सौदों की बात उभरकर आई है। आयकर अधिकारियों का आकलन है कि इस व्यवस्थित साजिश के कारण विभाग को महज पांच वर्षों में करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है।
