
नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय जनता पार्टी के महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सोशल मीडिया पर उनका नाम जोड़े जाने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह याचिका कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दाखिल की गई है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दुष्यंत गौतम ने अदालत से उनके खिलाफ प्रसारित कथित मानहानिकारक वीडियो और पोस्ट हटाने के निर्देश देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को हो सकती है।
याचिका में कहा गया है कि 24 दिसंबर 2024 को सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक कंटेंट प्रसारित किया गया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। दुष्यंत गौतम का आरोप है कि यह सामग्री जानबूझकर गढ़ी गई ताकि उन्हें एक ऐसे आपराधिक मामले से जोड़ा जा सके, जिसमें उनका कोई भी संबंध नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न तो उन्हें कभी आरोपी बनाया गया और न ही किसी जांच एजेंसी ने उनकी संलिप्तता पाई है। याचिका के अनुसार, यह पूरा अभियान फेक न्यूज के दायरे में आता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में सितंबर 2022 में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में भाजपा के पूर्व नेता के बेटे पुलकित आर्य को मुख्य आरोपी बनाया गया था। अदालत ने बाद में पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले में भ्रामक जानकारियां फैलाने के आरोप में उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की हैं। व्यापक जांच के बावजूद दुष्यंत गौतम को इस मामले से जोड़ने वाला कोई भी सबूत सामने नहीं आया है।बताया गया है कि दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया अदालत में पैरवी करेंगे।
हाल ही में यह मामला तब चर्चा में आया, जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने एक वीडियो और ऑडियो जारी कर आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी पर जिस वीआईपी से संबंध बनाने का दबाव डाला गया था, वह भाजपा का वरिष्ठ नेता था। ऑडियो में कथित तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम लिया गया, जिसे बाद में राठौर ने एआई से तैयार बताया और आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने दुष्यंत गौतम पर हमले तेज कर दिए, जिसके चलते यह मामला अदालत तक पहुंच गया।
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