

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस के लिए आगामी उत्तराखंड चुनाव करो या मरो की तरह है। वह सभी 70 सीटों पर फोकस बनाए रखने की बात कह रहे हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड को उन्होंने बड़ा चुनाव मुद्दा बना दिया है। ऐसे तमाम मुद्दों पर हमारे अखबार नवभारत टाइम्स ने उनसे बात की है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता ने इस बार खुद को चुनावी मैदान में न उतारने का संकेत दिया है। हरीश रावत ने विभिन्न मुद्दों पर बात की है।
अंकिता ने मौत से एक दिन पहले अपने दोस्त को कहा था कि जहां मैं काम कर रही हूं वहां कल एक VIP आएंगे। मेरे ऊपर उनको स्पेशल सेवा देने का दबाव डाला जा रहा है है। उसके बाद उसकी हत्या हो जाती है। इस बयान को इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा नहीं बनाया गया। वहां साक्ष्य नष्ट किए गए। उस रिजॉर्ट पर बुलडोजर चला दिया गया और वहां आग लगा दी गई।
इससे पुष्ट होता है कि वहां कोई VIP आने वाला था और वह रिजॉर्ट ‘प्लेजर पॉलिटिक्स’ का अड्डा बना हुआ था। हाल ही में BJP के भीतर से ही जिस VIP के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए, मामला CBI को सौंपा जाए और हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच हो।
आपने VIP एंगल की बात उठाई, पर कोई नाम सार्वजनिक नहीं किया…पूर्व BJP विधायक और उनकी पत्नी का जो बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ है, उसमें जो नाम आ रहे हैं, उनकी जांच हो सरकार ऐसे लोगों को बचाना चाहती है ताकि BJP के लिए राष्ट्रीय शर्म की बात न बने।
हाल में उत्तराखंड में नई प्रदेश कांग्रेस कमिटी के गठन के बाद आपने सोशल मीडिया पर लिखा कि आपको बूथ का अध्यक्ष बना दिया जाए। नाराजगी थी?मैं लोगों का आह्वान कर रहा था कि अपने-अपने बूथ को मजबूत करें। बूथ ही चुनाव के नतीजे तय करता है। कोई नाराजगी नहीं थी।
कांग्रेस के अंदर एक प्रक्रिया है। पहले विधानमंडल के सदस्य निर्णय लेते हैं और फिर खरगे जी, राहुल जी और अन्य वरिष्ठ नेता मुहर लगाते हैं कि मुख्यमंत्री पद उम्मीदवार कौन होगा। हम लगातार तीसरी बार चुनाव नहीं हारना चाहते। इसलिए मैं हर कीमत पर चुनाव जिताने के लिए काम करूंगा।
आप खुद नहीं लड़ेंगे अगला चुनाव?2027 का विधानसभा चुनाव करो या मरो का चुनाव होगा। मैंने दृढ़ता से कहा है कि मैं चुनाव लड़ाऊंगा, खुद नहीं लडूंगा। कैंपेन संभालने के लिए भी कोई चाहिए।
राहुल गांधी लगातार वोट चोरी और SIR के मुद्दे उठा रहे हैं। बिहार के नतीजे कांग्रेस के लिए संतोषजनक नहीं आए। क्या पार्टी उनकी बात से सहमत है?कुछ वर्षों से चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़ लिए जाते हैं और ऐसे कई नाम काट दिए जाते हैं जो विपक्ष के संभावित वोटर होते हैं। यह खुली वोट चोरी है। राहुल गांधी ने इसे संगठित वोट चोरी नाम दिया।
