
देहरादून | सरकारी योजनाओं के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया अब पहले से आसान हो सकती है। भू-अधिग्रहण की लंबी और जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए राज्य सरकार नई लैंड परचेज पॉलिसी तैयार कर रही है। इस पॉलिसी को जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में आम लोगों को उनकी जमीन का ज्यादा और उचित मुआवजा मिलेगा।
भू-अधिग्रहण की जगह होगा सीधा जमीन क्रय
फिलहाल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया में लंबा समय लगने के कारण कई योजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं, जबकि कुछ योजनाओं को बीच में ही ड्रॉप करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए राजस्व विभाग भू-अधिग्रहण के विकल्प के तौर पर लैंड परचेज पॉलिसी लाने की तैयारी कर रहा है।
अगली कैबिनेट में रखा जाएगा प्रस्ताव
राजस्व विभाग की योजना है कि अगली कैबिनेट बैठक में लैंड परचेज पॉलिसी को मंजूरी के लिए पेश किया जाए। इस पॉलिसी के तहत सरकार सीधे जमीन मालिकों से बातचीत कर जमीन खरीदेगी, जिससे कानूनी पेचीदगियां और समय की बर्बादी कम होगी।
मौजूदा व्यवस्था में चार गुना मुआवजा
वर्तमान में भू-अधिग्रहण नीति के तहत जमीन के सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान है। नई लैंड परचेज पॉलिसी में इससे भी बेहतर शर्तें रखने की तैयारी है, ताकि लोग स्वेच्छा से अपनी जमीन सरकार को बेचने के लिए तैयार हों। पॉलिसी को आकर्षक और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
योजनाओं की लागत भी होगी नियंत्रित
राजस्व सचिव एस.एन. पांडेय ने बताया कि भू-अधिग्रहण प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण योजनाओं में देरी होती है, जिससे उनकी लागत भी बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए सरकार दूसरे विकल्प के रूप में लैंड परचेज पॉलिसी पर काम कर रही है।
सरकार का मानना है कि नई नीति लागू होने से विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी और आम लोगों को भी उनकी जमीन का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
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