

Science News: यूरोप के सेंटिनल-2 सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग की तस्वीरें ली हैं. इस सैटेलाइट मिशन को शुरू हुए 10 साल हो चुके हैं. यह सैटेलाइट जमीन और समुद्र के किनारों की तस्वीरें लेता है जिसकी मदद से खेती, जंगलों और पानी के प्रबंधन में बहुत मदद मिलती है. इस तस्वीर को 9 दिसंबर 2025 को लिया गया था. हालांकि, जनवरी 2026 में भी हालात सुधरे नहीं हैं और उत्तराखंड के नंदा देवी बोयास्फीयर रिजर्व के कई हिस्सों में अब भी भयंकर आग लगी हुई है.
यह सैटेलाइट कैसे काम करती है?हर सेंटिनल-2 सैटेलाइट में एक बहुत ही एडवांस डिजिटल कैमरा लगा होता है. यह कैमरा सूरज की उन किरणों को रिकॉर्ड करता है जो जमीन और हवा से टकराकर वापस आती हैं. यह कैमरा एक बार में 290 किमी जितनी चौड़ी जगह की तस्वीर बहुत आराम से ले सकता है. इतनी बड़ी क्षमता की वजह से यह एक ही बार में विशाल जंगलों और बहुत बड़े इलाकों की निगरानी कर सकता है.
इसका सिस्टम कैसे काम करता है?इस मिशन में कई सारे सैटेलाइट्स एक साथ काम करते हैं. ये अंतरिक्ष में एक-दूसरे से समान दूरी पर चलते हैं जिससे यह फायदा होता है कि तस्वीरें बहुत जल्दी-जल्दी और बड़े इलाके की ली जा सकती हैं. साल 2017 में सेंटिनल-2बी को जोड़ा गया था. बता दें कि साल 2024 में सेंटिनल-2सी ने काम शुरू किया.
और क्या-क्या काम करता है सेंटिनल?यूरोप का कोपरनिकस प्रोग्राम इन सैटेलाइट्स का इस्तेमाल सिर्फ जमीन की जांच के लिए नहीं करता. इसके और भी कई बड़े काम हैं जैसे- ये सैटेलाइट्स समुद्र के अंदर रहने वाले जीवों और उनकी स्थिति पर नजर रखते हैं, ये हवा में मौजूद मीथेन जैसी गैसों को पहचान लेते हैं जो प्रदूषण को समझने के लिए जरूरी है. साथ ही, ये प्रकृति से जुड़ी कई और जरूरी जानकारियां इकट्ठा करने में मदद करते हैं.
क्या है वैज्ञानिकों के लिए इसके फायदे?इन सैटेलाइट्स से वैज्ञानिकों को लगातार साफ और नई तस्वीरें मिलती रहती हैं. इससे उन्हें जमीन की देखभाल करने और पर्यावरण में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिलती है. यह डेटा सरकार और अफसरों को प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ी सही फैसले लेने में मदद करता है. ये सिर्फ जमीन नहीं बल्कि नदियों, झीलों और बर्फीली ध्रुवीय इलाकों की भी निगरानी करते हैं.
