
उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और विधायक इन दिनों दिल्ली में मौजूद हैं, जहां भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नामांकन और निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया चल रही है। इन मुलाकातों ने मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों को और बल प्रदान किया है।
प्रमुख बिंदु:
दिल्ली में सक्रियता: सोमवार (19 जनवरी 2026) को मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा मुख्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उत्तराखंड के कई विधायक और मंत्री भी दिल्ली में डटे हुए हैं, जिससे मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोर पकड़ गई हैं।
खाली पदों की संख्या: वर्तमान में धामी सरकार में करीब 5 मंत्री पद खाली बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विस्तार में 10-12 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय उच्च स्तरीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री के विवेकाधिकार पर निर्भर है।
समय का महत्व: यह चर्चा अगस्त 2025 से चल रही है, लेकिन जनवरी 2026 में दिल्ली की इन बैठकों ने इसे नया मोड़ दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य स्तर पर फैसला हो सकता है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक 21 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित है, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
राजनीतिक संदर्भ: यह विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव (मिशन 2027) की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। नए मंत्रियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास हो सकता है, ताकि पार्टी में नई ऊर्जा आए और संगठन मजबूत हो।
प्रदेश प्रवक्ता का बयान: राजपुर विधायक और प्रदेश प्रवक्ता खजानदास ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सभी बड़े नेता दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन प्रक्रिया में शामिल हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ही आगे बढ़ा जाएगा।
हालांकि हाल की कैबिनेट बैठकों (जैसे 15 जनवरी 2026) में यूसीसी संशोधन, उपनल कर्मियों को समान वेतन, पर्यटन नियमावली-2026 और अन्य 19 प्रस्तावों पर मुहर लगी है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार अभी लंबित है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार जारी है। यदि कोई नया विकास होता है, तो स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। यह कदम उत्तराखंड में भाजपा सरकार की मजबूती और चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
