

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को दून में हुए चिंतन शिविर में अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने दो टूक कहा-‘मैंने किससे क्या कहा, किसने काम किया, यह मैं भूलता नहीं हूं। सालों साल याद रखता हूं।’ सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों, नीति आयोग के विशेषज्ञों के बीच सीएम ने करीब 45 मिनट अपनी बात रखी। सीएम ने इस दौरान कठोर प्रशासक, आत्मविश्वास से लबरेज राजनीतिक और धर्मनिष्ठ आम आदमी के रूप में तीन संदेश दिए।
चुनौतियों को अवसर में बदलने का संदेशमुख्यमंत्री ने शुरू में अधिकारियों को जनता के प्रति समर्पित रहने, जनकेंद्रित योजना बनाने और उनका लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहने की सीख दी। बाद में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में चुनौतियों का जिक्र करते हुए कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई चुनौतियां हैं। हर क्षेत्र में हैं लेकिन, इनको ही तो अवसर में बदलना है। यदि चुनौतियां के आगे आप निर्भीक होकर खड़े हैं तो गोली आएगी, जरूर जाएगी, लेकिन उसकी दिशा बदल जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि कौन-कौन, अपनी सरकारी सेवा के सबसे पहले तैनाती स्थल पर गए?
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देशमालूम हो कि सीएम ने सालभर पहले अफसरों से अपेक्षा की थी कि वो अपने पहले तैनाती स्थल जाएं और उसे एक प्रकार से गोद लेते हुए वहां के विकास पर विशेष फोकस करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि आप जा रहे हैं? इस सवाल पर अफसरों को बगलें झांकते देख मुख्यमंत्री की त्यौरियां चढ़ गईं। उन्होंने सख्ती से कहा कि यह ठीक नहीं है। सरकार तो एक दिन की भी होती है और यहां तो अभी एक साल बाकी है। और आगे भी बहुत-बहुत संभावनाएं हैं। धामी यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने कहा कि मैंने किसे क्या कहा और किसने काम किया, यह मैं भूलता नहीं हूं। सालों साल तक याद रखता हूं। जो कहा जाए, उसका अक्षरश: पालन होना चाहिए। अधिकारियों को चाहिए कि ऐसा काम करें कि उनकी नीतियों को सदा याद रखा जाए। बाकी तो समय है, बीत ही जाएगा। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरके सुधांशु ने चिंतन शिविर के उद्देश्य की जानकारी दी। प्रमुख सचिव नियोजन आर.मीनाक्षीसुंदरम ने वर्ष 2000 से अब तक राज्य के विकास का ब्योरा पेश किया व भावी रणनीति बताई। सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. नीलम पटेल ने भी विचार रखे।
‘भगवान एक-एक पाई का हिसाब रख रहा है’मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनता की सेवा में समर्पित रहने की सलाह देते हुए कहा कि भगवान के यहां एक-एक पाई का हिसाब होता है। सबका अकाउंट खुला है। जितना अच्छा काम करेंगे, लोगों की मदद करेंगे, भगवान के बैंक में बैलेंस बढ़ता जाएगा। यदि आप जानबूझकर लोगों की सहायता नहीं करते, अड़ंगे लगाते हो तो प्रत्यक्ष रूप में भले दंड न मिले, पर भगवान के यहां आपका बैलेंस जीरो हो जाएगा।
‘गलती का अहसास होने पर कांप उठता हूं’मुख्यमंत्री ने अफसरों से जोर देते हुए कहा कि सबका ध्येय जनसेवा ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी जानबूझकर किसी का अहित का काम न हो। मुझे कभी अहसास होता है कि मैंने कोई गलती की है तो मैं कांप उठता हूं। सो नहीं पाता। भगवान से क्षमा मांगता हूं। फिर नई ऊर्जा के साथ जनता की सेवा में जुट जाता हूं। जनसेवा के क्षेत्र में रहने वाले हर व्यक्ति का यही ध्येय होना चाहिए कि उसके द्वारा किसी का अहित न हो।
