
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत प्रदेश में बनाए गए जियो लाइन टैंकों (Geo Line Tank) की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कृषि मंत्री कार्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कृषि निदेशालय द्वारा जांच प्रक्रिया में चयनात्मक रवैया अपनाए जाने के आरोप सामने आए हैं।
कृषि मंत्री कार्यालय द्वारा पत्रांक 3287, दिनांक 21 नवंबर 2025 को जारी आदेश में साफ़ कहा गया था कि “समस्त जिलों में निर्मित जियो लाइन टैंकों की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और दोषी फर्मों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।” यह निर्देश तब जारी हुआ, जब मंत्री के निरीक्षण के दौरान चमोली, रुद्रप्रयाग और पौड़ी जनपदों में निर्मित टैंकों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे।
इसके बावजूद, कृषि निदेशालय द्वारा 24 नवंबर 2025 को जारी पत्र और RTI से प्राप्त दस्तावेज़ों से जो तस्वीर सामने आई है, वह चौंकाने वाली है।
तीन फर्में अधिकृत, जांच सिर्फ़ एक की
दस्तावेज़ों के अनुसार उस समय प्रदेश में जियो लाइन टैंक निर्माण के लिए तीन फर्में अधिकृत थीं—
• Saaransh Agro Solution
• Shalimar Enviro Pvt Ltd
• Varun Fertilizers Pvt Ltd
RTI में सामने आया कि केवल Varun Fertilizers Pvt Ltd द्वारा निर्मित टैंकों की गुणवत्ता जांच कराई गई, जबकि Saaransh Agro Solution और Shalimar Enviro Pvt Ltd को बिना किसी भौतिक या तकनीकी जांच के ही संतोषजनक मान लिया गया।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कृषि मंत्री कार्यालय के निर्देश “समस्त फर्मों व समस्त जिलों” के लिए थे, तो फिर जांच सिर्फ़ एक फर्म तक क्यों सीमित रही?
क्या दो फर्मों को जानबूझकर जांच के दायरे से बाहर रखा गया?
RTI दस्तावेज़ यह भी बताते हैं कि मंत्री कार्यालय ने स्पष्ट कहा था कि यदि गुणवत्ता मानकों में कमी पाई जाए, तो संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनका पंजीकरण समाप्त किया जाए। लेकिन कृषि निदेशालय द्वारा की गई आंशिक और चयनात्मक जांच से यह संदेह और गहराता है कि कहीं यह सब इसलिए तो नहीं था कि इन दो फर्मों को ही आगे काम दिया जाए इस लिए इनकी जाँच नहीं की गई और इन्हें बचा लिया गया
यह पूरा मामला पूर्व कृषि अधिकारी, RTI एक्टिविस्ट एवं समाजसेवी चन्द्र शेखर जोशी (भीमताल निवासी) द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों से उजागर हुआ है।
अब बड़े सवाल ये उठ रहे हैं कि किसके कहने पर इस तरह की पक्षपाती रिपोर्ट बनायी गई क्या जांच प्रक्रिया में चयनात्मकता और पक्षपात हुआ ? क्या यह मामला वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है?
जियो लाइन टैंकों जैसी योजनाएं किसानों की सिंचाई और आजीविका से सीधे जुड़ी हैं। ऐसे में गुणवत्ता जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि किसानों के हितों के साथ भी खिलवाड़ माना जाएगा।
जियो लाइन टैंक निर्माण में अवधि विस्तार पर सवाल, पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं आपको बता दें कि पत्रांक संख्या 5058 पंजी./जियो लाइन टैंक/2025–26, दिनांक 25 सितम्बर 2025 के माध्यम से इन्ही तीन फर्मों—Saransh Agro Solution, Shalimar Enviro Pvt. Ltd., Varun Fertilizers Pvt. Ltd.—को जियो लाइन टैंक निर्माण कार्य की अवधि मार्च 2026 तक बढ़ाए जाने का आदेश जारी किया गया था । इस निर्णय को लेकर विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। क्यों विभाग द्वारा बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए इन फ़र्मों अवधी बढ़ा दी गई और किसके कहने पर ये सब हो रहा है
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय एवम् प्रधानमंत्री कार्यालय इसका संज्ञान लेगा और इसकी विजलेंस से जाँच के साथ ही उन सभी को भी तत्काल निलंबित करना चाहिए जिन लोगों ने ये जाँच की क्योंकि विभाग और विभागीय मंत्री जी से तो किसी प्रकार उम्मीद करना ही बेकार है गढ़ी कैंट टेंट प्रकरण तो सभी को याद ही होगा जहाँ पर टेंडर निकलने से पहले ही टेंट वाले को पता था कि उसका ही टेंडर निकलेगा . इसलिए विभाग की जांच रिपोर्ट पर तो कोई क्या भरोसा करेगा..
