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पर्यटन नगरी मसूरी में 12 फरवरी को राष्ट्रीय राजमार्ग 707ए (त्यूनी–चकराता–मसूरी–बाटाघाट) के किमी 162 पर होटल देवलोक के समीप सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया था। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि अवैध खनन और बिना अनुमति ढलान कटिंग के कारण राजमार्ग की नींव कमजोर हुई, जिसके चलते मार्ग धंस गया। मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है।
प्रशासन ने संबंधित भूस्वामियों पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अतिरिक्त 80 लाख रुपये की रिकवरी चार्ज (आरसी) भी निर्धारित की गई है। अधिकारियों के मुताबिक यह राशि सड़क की मरम्मत, ढलान स्थिरीकरण और सुरक्षा उपायों पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए तय की गई है। स्पष्ट किया गया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध खनन के मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग, खनन और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार होटल देवलोक, वाल्मीकि मंदिर के पास निजी भूमि पर निर्माण और खुदाई का कार्य चल रहा था। आरोप है कि आवश्यक अनुमति के बिना की गई कटिंग और खनन गतिविधियों से राजमार्ग के नीचे की संरचना कमजोर हुई, जिससे सड़क का हिस्सा बैठ गया। इसके चलते मसूरी से कैम्पटी, उत्तरकाशी और चारधाम यात्रा मार्ग की आवाजाही प्रभावित रही और पर्यटकों व स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामले में एक जनप्रतिनिधि का नाम सामने आने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष ढंग से होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका प्रभाव कितना भी हो।
घटना के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया गया। विशेषज्ञों की टीम ने स्थल निरीक्षण कर ढलान और आधार संरचना का मूल्यांकन किया है। अस्थायी रूप से मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए बैरिकेडिंग और मलबा हटाने का कार्य किया गया है, जबकि स्थायी पुनर्निर्माण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
जिला प्रशासन की कार्रवाई को अवैध खनन और अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में राजमार्ग या अन्य सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।