देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रिइम्बर्समेंट) दावों की जांच के दौरान बड़ी अनियमितता सामने आई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल की फार्मेसी में दवा उपलब्ध होने के बावजूद कुछ डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे थे।
प्रतिपूर्ति बिलों की जांच में खुलासा
मामला तब सामने आया जब प्रतिपूर्ति के लिए जमा किए गए बिलों की जांच की गई। कई मामलों में जिन दवाओं के बिल बाजार से लगाए गए थे, वे उसी समय अस्पताल की फार्मेसी में उपलब्ध पाई गईं। इसे नियमों की अनदेखी और कार्यप्रणाली की कमजोरी माना जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फार्मेसी में 650 से अधिक प्रकार की दवाएं नियमित रूप से उपलब्ध हैं और मरीजों को वितरित की जाती हैं। ऐसे में बाहर से दवा लिखना मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालता है और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
चिकित्सा अधीक्षक ने जारी किए सख्त निर्देश
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाएं ही लिखी जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में दवा अस्पताल में उपलब्ध न हो और उसे लिखना आवश्यक हो, तो ऐसी स्थिति में अस्पताल परिसर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से संबंधित दवा लिखने के लिए मरीज को प्रेरित किया जाए।
नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा अधीक्षक ने यह भी कहा कि पूर्व में भी इस संबंध में आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया जाना गंभीर लापरवाही है।
अस्पताल प्रशासन ने अब दवा लिखने और स्टॉक निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है।
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