देहरादून। Dehradun News नवरात्र के पावन अवसर पर देहरादून जिला प्रशासन ने एक प्रेरणादायक पहल करते हुए जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को नया जीवन दिया।
सविन बंसल ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित कार्यक्रम में 10 बालिकाओं को ₹2.03 लाख के चेक वितरित कर उनकी बाधित पढ़ाई को पुनर्जीवित किया।
‘नंदा-सुनंदा’ योजना बनी बेटियों के लिए उम्मीद
जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘नंदा-सुनंदा’ के तहत अब तक 136 से अधिक जरूरतमंद और असहाय बालिकाओं की शिक्षा को फिर से शुरू किया जा चुका है।
यह पहल न सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित है, बल्कि बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम भी कर रही है।
DM बोले—बेटी सशक्त तो समाज सशक्त
कार्यक्रम में DM सविन बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कोई कमी न रहे।
उन्होंने कहा, “अगर हम एक बेटी को सशक्त करते हैं, तो पूरा परिवार और समाज सशक्त होता है।”
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इस पहल से कई बेटियों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया:
पिता की मृत्यु के बाद आराध्या, माही चौहान, सोफिया अल्वी, अनुष्का शर्मा और हर्षिता की पढ़ाई रुक गई थी—अब फिर शुरू हो गई
मान्यता ठाकुर, जिनके परिवार पर आर्थिक संकट था और बड़ी बहन दिव्यांग है—उनकी 10वीं की पढ़ाई दोबारा शुरू हुई
नियति वासुदेव के पिता की नशे की लत के कारण पढ़ाई बाधित थी—अब प्रशासन ने सहारा दिया
नंदनी और नंदिता की फीस न भर पाने के कारण 9 महीने से पढ़ाई रुकी थी—अब फिर शुरू
त्रिशा, जिनकी मां का कैंसर से निधन हो गया—उनकी शिक्षा भी दोबारा शुरू कराई गई
कैसे काम कर रही है योजना?
‘नंदा-सुनंदा’ योजना के तहत उन बालिकाओं को चिन्हित किया जाता है जिनकी शिक्षा पारिवारिक या आर्थिक संकट के कारण रुक गई है।
इसके बाद जिला प्रशासन उनकी फीस और अन्य शैक्षिक जरूरतों को पूरा कर पढ़ाई फिर से शुरू कराता है।
प्रशासन और पुलिस दोनों का सहयोग
अभिनव शाह ने बालिकाओं को पढ़ाई पर ध्यान देने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वहीं प्रमोद कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस भी हर संभव मदद के लिए तैयार है।
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समाज के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल
कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताया।
‘नंदा-सुनंदा’ योजना आज उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है, जिनकी पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण अधूरी रह गई थी।
