
उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. बीजेपी को पिछले विधानसभा चुनावों में जिन सीटों पर हार मिली थी या जीत का मार्जिन बहुत कम था ऐसी सीटों पर जीत के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दिया है.
ऐसी सीटों पर एक एक बड़े नेता की जिम्मेदारी लगाई जा रही है. इन नेताओं का काम उस विधानसभा सीट पर संगठन की स्थिति, उम्मीदवारों के नाम और मुद्दों समेत सभी विषयों पर विधानसभा चुनावों से पहले रिपोर्ट देनी होगी. यानी 2027 के लिए बीजेपी ने ‘वन सीट-वन प्रभारी’ का माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल तैयार कर लिया है.
हारी हुई और कम मार्जिन वाली सीटों पर बीजेपी का फोकसउत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के मिशन पर बीजेपी ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है. संसद के मानसून सत्र के समय दिल्ली में हुई प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में पार्टी ने उन 23 विधानसभा सीटों पर फोकस बढ़ाने का फैसला किया, जहां 2022 में बीजेपी को हार मिली थी या जीत का मार्जिन बहुत कम था.
अब इन सीटों पर संगठन को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ-साथ सीधे वरिष्ठ नेताओं की निगरानी होगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा, सांसद अनिल बलूनी को बद्रीनाथ और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को पिरान कलियर की जिम्मेदारी दी गई है. बाकी सीटों पर भी सांसदों, मंत्रियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है.
नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरेगी बीजेपीपार्टी की रणनीति साफ है हर सीट पर अलग रणनीति बनाकर चुनाव में उतरा जाएगा. हर प्रभारी नेता को अपने विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, संगठन की ताकत, स्थानीय नाराजगी, संभावित उम्मीदवारों, जातीय और सामाजिक समीकरणों और जनता के मुद्दों की जानकारी जुटानी होगी.
पार्टी के सर्वे में बीजेपी की 37 सीटों पर बढ़तपार्टी के आंतरिक आकलन में 2022 की हार के पीछे स्थानीय असंतोष, टिकट को लेकर नाराजगी और संगठनात्मक कमजोरियों जैसे कारण सामने आए थे. पार्टी की कोशिश है कि इस बार चुनाव से काफी पहले ही इन कमियों को दूर कर लिया जाए. हाल की में पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे की रिपोर्ट में बीजेपी को 37 सीटो पर बढ़त दिखाई गई है.
हालांकि अभी ये पार्टी द्वारा कराया गया पहला सर्वे है. लेकिन इस सर्वे में भी बीजेपी 22 सीटें जीतती हुई दिख रही है और कुल 37 सीटो पर बढ़त बनाते हुए नजर आ रही है. इसलिए पार्टी का फोकस इस बार हारी हुई सीटों पर भी रहने वाला है. जिस से अगर पिछली बार की जीती हुई सीटों पर किसी कारण से हार का सामना भी करना पड़े तो हारी हुई सीटों पर जीत दर्ज करके उस कमी को पूरा किया जा सके.
