13 फरवरी को SSC मल्टी टास्किंग स्टाफ और हवलदार परीक्षा-2025 के दौरान संगठित तरीके से रिमोट एक्सेस संसाधनों से नकल कराने का है मामला
देहरादून: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ऑनलाइन परीक्षा में कथित तौर पर रिमोट एक्सेस के जरिए नकल कराने के मामले में आरोपी प्रदीप चौहान को कोर्ट से राहत नहीं मिली है. देहरादून सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र रिमोट एक्सेस के जरिए बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराने की साजिश में सामने आती है.
14 फरवरी को दर्ज हुई थी एफआईआर: पुलिस उपाधीक्षक जगदीश चंद्र पंत की ओर से 14 फरवरी 2026 को देहरादून नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था. आरोप है कि 13 फरवरी को महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इंटर कॉलेज में SSC मल्टी टास्किंग स्टाफ और हवलदार परीक्षा-2025 के दौरान संगठित तरीके से रिमोट एक्सेस संसाधनों का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को नकल कराई जा रही थी.
रिमोट एक्सेस से बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराने का आरोप: अभियोजन के मुताबिक प्रदीप चौहान अन्य आरोपियों के साथ मिलकर परीक्षा केंद्रों को ऐसी तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराता था, जिससे केंद्र के नेटवर्क को बाहर बैठे सॉल्वर से जोड़ा जा सके. इसके बाद अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र बाहर बैठे सॉल्वर से हल कराए जाते थे और इसके बदले अभ्यर्थियों से पैसे लिए जाते थे.
बचाव पक्ष ने बताया झूठा फंसाया गया: जमानत के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि प्रदीप चौहान निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है. वह न तो परीक्षा केंद्र का मालिक था, न पर्यवेक्षक और न ही परीक्षार्थी. उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई. बचाव पक्ष ने एक सह-आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिलने का हवाला भी दिया.
अभियोजन ने जमानत का किया विरोध: अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की. अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ परीक्षा में नकल कराने से जुड़ा एक अन्य मामला भी दर्ज है. रिकॉर्ड और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने माना कि जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं और याचिका खारिज कर दी.
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