
पौड़ी। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ जिले के 1,726 ग्रामीणों को मिला है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पशुपालन विभाग की योजनाओं के तहत लाभार्थियों को कुल 8 करोड़ 64 लाख 90 हजार 506 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। विभाग का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पात्र परिवारों को पशुपालन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आर्थिक सहायता के अलावा लाभार्थियों को पशुपालन इकाइयों के संचालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग भी दिया जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों में गौपालन योजना के तहत 361 लाभार्थियों को 1.30 करोड़ रुपये की सहायता मिली। वहीं सामान्य वर्ग बकरी पालन योजना के 162 लाभार्थियों को 1.02 करोड़ रुपये और एससीपी बकरी पालन योजना के 241 लाभार्थियों को 1.52 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
इसी तरह महिला बकरी पालन योजना के तहत 82 लाभार्थियों को 28.70 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत 305 लाभार्थियों को 1.92 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।

विभाग की ओर से गौपालन, बकरी पालन, महिला बकरी पालन, मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन, गोट वैली और ब्रायलर फार्म समेत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनके जरिए ग्रामीणों को पशुपालन इकाइयां स्थापित करने और दूध, मांस व अंडा उत्पादन जैसी गतिविधियों से आय अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक पात्र ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं को इन योजनाओं से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।




