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देहरादून। प्रदेश के राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आमजन को उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क डायग्नोस्टिक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए सरकार ने अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित की है। नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान में कार्यरत एजेंसी को सीमित अवधि के लिए विस्तार दिया जा रहा है, ताकि मरीजों को आवश्यक जांचों के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि निःशुल्क डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए नई एजेंसी के चयन की नवीन टेंडर प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने और चयनित एजेंसी द्वारा सेवाएं शुरू किए जाने तक स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान एजेंसी को दिया जा रहा विस्तार केवल निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक की सीमित अवधि के लिए है। इसे किसी दीर्घकालिक अनुबंध या स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल संक्रमण अवधि में मरीजों को जांच सुविधाएं उपलब्ध कराते रहना है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांचें सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल हैं। इनके बाधित होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नई एजेंसी के चयन तक सेवाओं को सुचारु रखना जनहित में आवश्यक है।सरकार का लक्ष्य है कि पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से नई एजेंसी का चयन जल्द पूरा किया जाए और प्रदेश के राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच सेवाएं लगातार मिलती रहें।
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