देहरादून। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, काम के दबाव में देर से सोना और सुबह जल्दी उठने की मजबूरी लोगों की नींद को प्रभावित कर रही है। पर्याप्त नींद न मिलने से दिनभर थकान, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन और कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना भी बेहद जरूरी है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद शरीर को आराम देने के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, याददाश्त, भावनात्मक संतुलन और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक व्यक्ति की नींद की जरूरत उसकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए बच्चों, किशोरों, वयस्कों और बुजुर्गों को अपनी उम्र के अनुरूप पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। नवजात शिशुओं के लिए 14 से 17 घंटे की नींदजीवन के शुरुआती वर्ष शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। नवजात शिशुओं को सामान्यतः 24 घंटे में 14 से 17 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। इस उम्र में शिशु की नींद छोटे-छोटे अंतराल में होती है, क्योंकि उन्हें बार-बार दूध पिलाने की जरूरत पड़ती है। शिशु के लिए सुरक्षित और आरामदायक सोने का वातावरण बनाना तथा उसकी नींद और जागने की दिनचर्या को धीरे-धीरे नियमित करना जरूरी है।छोटे बच्चों को 10 से 13 घंटे की नींद जरूरीएक से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों के शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन के लिए पर्याप्त नींद महत्वपूर्ण है। तीन से पांच वर्ष के बच्चों को सामान्यतः 10 से 13 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है, जिसमें दिन की नींद भी शामिल हो सकती है। बच्चों को निर्धारित समय पर सुलाने, सोने से पहले मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल सीमित करने तथा शांत वातावरण उपलब्ध कराने से उनकी नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।स्कूली बच्चों और किशोरों को भी पूरी करनी चाहिए नींदस्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद पढ़ाई, याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बनाए रखने में मददगार होती है। छह से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों को सामान्यतः 9 से 12 घंटे, जबकि 13 से 18 वर्ष के किशोरों को 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए। परीक्षा की तैयारी के दौरान देर रात तक जागना और नींद में कटौती करना पढ़ाई की गुणवत्ता तथा अगले दिन की एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ नींद के लिए भी पर्याप्त समय निकालना चाहिए।वयस्कों के लिए सात से नौ घंटे की नींद जरूरी18 से 64 वर्ष की उम्र के अधिकांश वयस्कों को प्रतिदिन कम से कम सात घंटे और सामान्यतः सात से नौ घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखना चाहिए। पर्याप्त नींद शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली, मानसिक सतर्कता और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होती है। लगातार कम सोने से दिनभर सुस्ती, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और काम करने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है। कामकाजी लोगों को अपनी दिनचर्या इस तरह व्यवस्थित करनी चाहिए कि वे नियमित रूप से पर्याप्त नींद ले सकें।बुजुर्गों को भी चाहिए सात से आठ घंटे की नींद65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए सामान्यतः सात से आठ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। बढ़ती उम्र के साथ नींद का पैटर्न बदल सकता है और रात में बार-बार जागने की समस्या भी हो सकती है। इसके बावजूद पर्याप्त नींद बुजुर्गों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सक्रियता और दैनिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि नींद लगातार प्रभावित हो रही हो या दिनभर अत्यधिक थकान बनी रहती हो, तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतेंस्वस्थ नींद के लिए केवल सोने के घंटों की संख्या ही नहीं, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए कुछ सामान्य आदतों को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।रोजाना सोने और जागने का समय निर्धारित रखें, यहां तक कि छुट्टी के दिनों में भी।सोने से पहले मोबाइल फोन, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करें।शाम और रात के समय चाय, कॉफी तथा अन्य कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें।सोने का कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक बनाए रखें।नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।रात में भारी भोजन करने और सोने से ठीक पहले अधिक सक्रिय गतिविधियां करने से बचें।तनाव कम करने के लिए ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास या हल्का संगीत सुनने जैसी गतिविधियां अपनाएं।नींद की समस्या को नजरअंदाज न करेंपर्याप्त नींद स्वस्थ जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार नींद की कमी का असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ दैनिक कार्यों पर भी पड़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक नींद आने में परेशानी हो, रात में बार-बार नींद टूटे, तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या हो या दिन में अत्यधिक नींद आए, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।: स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद तीनों का संतुलन जरूरी है। समय पर सोने और नियमित दिनचर्या अपनाने से नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। अच्छी नींद शरीर को आराम देने के साथ-साथ अगले दिन को अधिक ऊर्जावान और सक्रिय बनाने में भी मदद करती है।अस्वीकरण: लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नींद से जुड़ी लगातार समस्या होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।



