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200 KM से आया खतरनाक कीड़ा, उत्तराखंड के जंगलों में मचा रहा तबाही, नाम जान अफसरों की उड़ी नींद.. – Uttarakhand

A dangerous insect came from 200 KM, wreaking havoc in the forests of Uttarakhand, knowing its name, the officers lost their sleep.इस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)रामनगर : उत्तराखंड के एक गंभीर संकट पैदा हो गया है. सर्दी शुरू ही हुई है कि यहां एक कीड़े ने दस्‍तक दे दी है. कीड़ा भी कोई आम नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक है. उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व से पीलीभीत होते हुए कुमाऊं के जंगलों में यह कीड़ा पहुंचा है. आलम ये है कि इसने साल के पेड़ों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है. जिस भी पेड़ पर ये बैठता है, उसे चट कर जाता है. पेड़ किसी काम का नहीं रहता. तना सफाचट कर जाता है. माने एकदम खोखला. इस साल तो इसके हमले की वजह से जंगलों में भयावह हालात पैदा हो गए हैं. करीब 2 हेक्‍टयेर के आसपास के जंगल खतरे में हैं. इससे निपटने के लिए वन विभाग और प्रकृति प्रेमी भी एक्टिव हो गए हैं.रामनगर वन प्रभाग में इस कीट के प्रभाव को साफ तौर पर देखा जा रहा है. खासतौर पर रामनगर के कोटा रेंज के करीब 2 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका असर देखा जा रहा है. इससे आसपास के जंगलों में साल के पेड़ों की स्थिति खराब हो रही है. इस क्षेत्र में इस कीट के हमले को रोकने के लिए वन विभाग ने एफआरआई (फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) को सूचित किया है. एफआरआई के वैज्ञानिक जल्द ही इन पेड़ों का इलाज करने के लिए पहुंचने वाले हैं.दरअसल, ये कीड़ा है साल बोरर कीट. ये एक ऐसा कीट है जो साल के पेड़ों के तनों में घुसकर उन्हें कमजोर करता है. यह कीट तने में छेद कर उसे तहस नहस कर देता है, जिससे पेड़ की शारीरिक संरचना पर असर पड़ता है और वह धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है. अगर इस कीट के प्रकोप को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह पेड़ों के जीवन को खतरे में डाल सकता है.प्रकृति प्रेमी संजय छिमवाल के अनुसार, “यह कीट साल के पेड़ों पर बहुत घातक प्रभाव डालता है. इस समय दुधवा, पीलीभीत और कुमाऊं के जंगलों में यह तेजी से फैल रहा है, जिससे जंगलों पर गहरा असर पड़ सकता है.”यह कीड़ा पहले भी भारतीय जंगलों में संकट का कारण बन चुका है. 60-70 के दशक में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में भी इस कीट ने साल के पेड़ों पर हमला किया था, जिससे उस समय जंगलों में भारी नुकसान हुआ था. अब, एक बार फिर से यह कीट हल्द्वानी और रामनगर के जंगलों में फैलने लगा है, जो बाघों के लिए एक अहम घर है.रामनगर फॉरेस्ट डिवीजन के डीएफओ, दिगंथ नायक ने बताया, “हमने इस कीट के प्रकोप के बारे में एफआरआई को सूचित किया है और विशेषज्ञों को भेजने के लिए कहा है. वे जल्द ही आकर इन पेड़ों का इलाज करेंगे ताकि जंगलों को इस संकट से बचाया जा सके.”

Nandni sharma

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