देहरादून: आपदा प्रभावित सहस्रधारा के पास मजाड़ा गांव पर एक और संकट मंडरा रहा है। गांव के ऊपर पहाड़ी पर करीब पांच फीट चौड़ी और 50 मीटर लंबी दरारें आ गई हैं, जो बड़ा खतरा बन सकती हैं। लिहाज, ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र पुनर्वास की मांग उठाई है। मजाड़ा में मंगलवार सुबह कारलीगाड़ से अतिवृष्टि के बाद आए मलबे से भारी नुकसान हुआ था। जिस जगह पर लोग मलबे में दबे थे, वह नदी के पार यानी कारलीगाड़ के सामने का क्षेत्र है। यहां तेज बारिश के बाद भूस्खलन हुआ था। भूस्खलन वाले स्थान से ऊपर पहाड़ी पर और गहरी दरारें मिली हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि ये दरारें पूरे गांव के ऊपर हैं। ऐसे में तेज बारिश आई तो पूरे गांव के भूस्खलन की जद में आने का खतरा है। ग्रामीण होशियार सिंह, मनोज कुमार ने बताया कि लोगों ने जीवन भर की कमाई से मकान बनाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि भूस्खलन हुआ तो उनका सब-कुछ चला जाएगा। मजाड़ा गांव में साठ से अधिक परिवार रहते हैं।
मुश्किल: मजाड़ा गांव में मलबे में दबे तीन लोग नहीं मिले मजाड़ा गांव में मलबे में दबे अंकित समेत तीन लोगों का गुरुवार को भी पता नहीं चला। प्रशासन की टीम सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक मौके पर थी। जेसीबी से मलबे को हटाकर तीनों की तलाश की गई, लेकिन शाम तक सफलता नहीं मिली। गुरुवार दोपहर बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, बच्चे मौके पर मौजूद थे। उम्मीद थी कि तीनों मिल जाएंगे, लेकिन शाम को मायूसी ही हाथ लगी। शाम को लोग सुरक्षित जगहों पर लौट गए। एसडीएम सदर हरिगिरी ने बताया कि प्रशासन की ओर से दरारों को देखा गया है। माैके पर अब भूगर्भीय सर्वे करवाया जाएगा। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद वहां के ग्रामीणों के पुनर्वास समेत तमाम उचित कदम उठाए जा सकेंगे।
हर ओर आपदा के निशान सन्नाटा और दुश्वारियां भी दून में सहस्रधारा से आगे कारलीगाड़ क्षेत्र दो दिन पहले आई आपदा की दास्तां बयां कर रहा है। यहां घरों पर ताले लटके हैं, पूरी घाटी में मातम पसरा है। नदी, गदेरों के शोर में रास्ते खोलने के लिए लगी मशीनों की आवाज भी दब सी रही है। यह क्षेत्र पर्यटकों से गुलजार रहता था।
सहस्रधारा से आधा किमी आगे सड़क का हिस्सा नदी में समा गया है। इससे पूरा क्षेत्र कट गया है। गुरुवार की दोपहर करीब 12.30 बजे जेसीबी की मदद से रास्ता बनाया जा रहा था। यहां से आगे पैदल जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा है। आपदा पीड़ित बामुश्किल एक रिजॉर्ट के रास्ते दूसरी ओर पहुंच रहे थे। सेरा गांव में मलबे में दबे वाहन आज भी ज्यों के त्यो हैं। रोड पर लोगों के वाहन फंसे हुए हैं। सेरा से मजाड़ा तक सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त है। लोग मुख्य सड़क के बजाय गांव की पगडंडियों से चलकर कारलीगाड़ पहुंच रहे हैं। रास्ते इतने खतरनाक हैं कि कब ऊपर से मलबा आ जाए, पता नहीं। नीचे नदी के वेग में बची हुई सड़कें भी समाने का खतरा है। जैसे-तैसे पैदल मजाड़ा एवं कारलीगाड़ तक पहुंच भी गए, तो आगे सड़क का नामोनिशां नहीं है। कारलीगाड़ के नीचे मलबे में दबे घर, रिजॉर्ट, बर्बाद खेत नजर आ रहे हैं। पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, बिजली के पोल टूटे पड़े हैं।
सेरा से ले जा रहे खाना मजाड़ा और कारलीगाड़ के लोगों की मदद के लिए सेरा गांव के लोग आगे आए हैं। सेरा में खाना बनाकर दो किमी पैदल चलकर आपदा प्रभावित जगह पहुंचाया जा रहा है। गुरुवार को युवक खतरनाक रास्तों से मजाड़ा तक खाना बनाकर ले गए।
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