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नेपाल में हिंसा के बाद उत्तराखंड सीमा पर अलर्ट, नवलपरासी में 500 कैदी फरार – myuttarakhandnews.com

चंपावत। नेपाल में उपजे ताजा विवाद और देशव्यापी प्रदर्शन के बाद बनबसा (चंपावत) में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा मार्ग को बंद कर दिया गया है। बुधवार सुबह से आवाजाही बंद है। यहां से दोनों देशों के बीच वाहनों और पैदल आवाजाही को अगले आदेश तक के लिए रोक दिया गया है। यद्यपि भारत में रहने वाले और भारत आए नेपाली नागरिकों को अपने देश लौटने दिया जा रहा है।
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) भी नेपाली नागरिकों को अपने देश लौटने दे रही है। अंतरराष्ट्रीय सीमा बंद होने से बनबसा क्षेत्र से होने वाली दैनिक सामान की आपूर्ति भी बंद हो गई है। बनबसा से तेल, साबुन, दाल, चावल, नमक आदि सीमावर्ती दुकानों के माध्यम से नेपाली नागरिकों तक पहुंचता है।
वहीं, पिथौरागढ़ जिले में धारचूला व झूलाघाट स्थित पैदल अंतरराष्ट्रीय पुलों पर भी एसएसबी ने चौकसी कड़ी कर दी है। पुलिस के साथ ही एसएसबी ने गश्त के लिए जवानों की संख्या बढ़ा दी है। भारत की सोनौली सीमा से सटे पश्चिम नवलपरासी जिले के परासी स्थित जेल से 500 से ज्यादा कैदी सुरक्षा घेरा को तोड़कर भाग गए हैं। कारागार के कर्मचारी किरण अर्याल ने ‘नेपाल प्रेस’ को बताया कि जेल में कुल 576 कैदी थे, जिनमें से 500 से अधिक गेट तोड़कर भाग निकले हैं।
नेपाल के रूपन्देही व नवलपरासी जिले में कर्फ्यू है। सेना गश्त कर रही है। हिंसा और तनाव को देखते हुए भारत-नेपाल की सभी सीमाएं सील हैं। किसी भी वाहन, व्यक्ति को आने-जाने की अनुमति नहीं है। आवश्यवस्तुओं से लदे वाहन भी भारतीय क्षेत्र में खड़े हैं।
नेपाल में आस्ट्रेलिया, फिनलैंड, फ्रांस, जापान, कोरिया, यूके, नार्वे, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, और अमेरिका के दूतावासों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर वहां के हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि काठमांडू समेत नेपाल के विभिन्न स्थानों पर हिंसा से हम सभी बेहद दुखी हैं।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा में जान-माल की क्षति हुई है। हम सभी पीड़ितों के परिवार और सभी प्रभावित लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हैं। हमारी सरकारें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के प्रति अपने दृढ़ समर्थन की पुष्टि करती हैं। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा को रोकने और इन मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।

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