अजेंद्र अजय ने बीकेटीसी को दिया नया आयाम

03 साल के दौरान बदली बीकेटीसी की कार्यसंस्कृति, किया सुधार
विकास कार्यों के लिए चर्चित रहेगा अजेंद्र अजय का कार्यकाल
देहरादून। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का तीन वर्ष का कार्यकाल इस 7 जनवरी को पूरा हो जाएगा। अध्यक्ष के रूप में अजेंद्र ने तमाम गतिरोधों के बीच अभूतपूर्व कार्य करते हुए बीकेटीसी को एक नई पहचान दिलाई। अजेंद्र ने अपने खिलाफ हुए विरोधों को दरकिनार करते हुए सुधारों की बयार को जारी रखा। अपने तीन वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने हर मोर्चे पर बीकेटीसी में कई मील के पत्थर तय किये।
वर्ष 2022 में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग करने के बाद सरकार ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले बीकेटीसी का गठन कर भाजपा के युवा नेता अजेंद्र अजय को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थीं। तब कोविड काल के पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चारधाम यात्रा को फिर से एक नया स्वरुप देने की कोशिशों में लगे हुए थे। अजेंद्र ने भी पदभार ग्रहण करते ही यात्रा को सुव्यवस्थित करने और बदरीनाथ व केदारनाथ समेत 47 छोटे-बड़े मंदिरों का प्रबंधन देखने वाली बीकेटीसी के ढांचे व कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव लाने की पहल शुरू की।
वर्ष 1939 में अंग्रेजों के समय गठित बीकेटीसी में अजेंद्र ने सफाई अभियान चलाया। उन्होंने पहली बार बीकेटीसी में व्यापक स्तर पर कार्मिकों का स्थानांतरण कर भूचाल ला दिया। कई कार्मिकों ने स्थानांतरण नीति को असफल करने की कोशिश की। मगर अजेंद्र किसी दवाब में नहीं आये और उन्होंने स्थानांतरण आदेशों का सख्ती से पालन कराया। बीकेटीसी में पहली बार किसी कार्मिक का निलंबन भी उनके कार्यकाल में ही हुआ। उन्होंने बीकेटीसी के विश्राम गृहों और प्रोटोकॉल व्यवस्था से जुड़े कार्मिकों को यात्रियों के साथ आतिथ्य पूर्ण व्यवहार के तौर – तरीके सिखाने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराया।
अजेंद्र ने बीकेटीसी में वित्तीय पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन पर जोर दिया। बीकेटीसी जैसे महत्पूर्ण संस्थान में वित्त अधिकारी का पद नहीं था। उन्होंने शासन से वित्त अधिकारी का पद सृजित कराते हुए इस पर प्रदेश वित्त सेवा के अधिकारी की तैनाती कराई। उनके कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है कि कभी वेतन और पेंशन देने के लिए परेशानियों का सामना करने वाली बीकेटीसी की आय में आज कई गुना वृद्धि हुई है। यही नहीं पहली बार बीकेटीसी ने यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए विगत यात्राकाल में दस करोड़ रूपये की धनराशि प्रदेश सरकार को सौंपी।
अध्यक्ष के रूप में अजेंद्र के कार्यकाल में एक अभूतपूर्व कार्य कार्मिकों के लिए सेवा नियमावली बनाना रहा है। सेवा नियमावली के अभाव में कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर पदोन्नति आदि में पारदर्शिता नहीं रहती थी। मनमाने तरीके से नियुक्तियां होने के कारण आज बीकेटीसी में करीब सात सौ कार्मिकों का भारी-भरकम ढांचा खड़ा हो गया है। बीकेटीसी में सेवा नियमावली बनाना आसान काम नहीं था। संवैधानिक पहलुओं के साथ ही धार्मिक मान्यताओं व परम्पराओं में समन्वय स्थापित करते हुए नियमावली का गठन चुनौतीपूर्ण था। कुछ लोगों ने इसमें भी बाधा पैदा करने के कई कोशिशें की। मगर अजेंद्र ने विरोध झेलते हुए भी इसे प्रदेश कैबिनेट से पारित करा दिया।
अजेंद्र ने अपने कार्यकाल में अपने अधीन उपेक्षित पड़े तमाम मंदिरों के जीर्णोद्वार व सौंदर्यीकरण के कार्य व्यापक स्तर पर कराये। विश्राम गृहों का मरम्मत व उच्चीकरण किया। वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ धाम में नष्ट हो गयी बीकेटीसी की सम्पत्तियों को फिर से खड़ा करने की पहल की। उनके कार्यकाल में केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने का निर्णय चर्चाओं में रहा। राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों ने भले ही इस पर विवाद खड़ा करने की कोशिश की हो। मगर गर्भगृह की स्वर्णिम आभा देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना है।
बदरी- केदार में श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर बड़ा खेल होता है। इसमें संगठित गिरोह काम करता है, जो श्रद्धालुओं से अवैध रूप से पैंसा लेकर उनको दर्शन कराता है। अजेंद्र ने व्यवस्थाओं में सुधार कर इस पर काफी हद तक लगाम लगाने की कोशिश की। इस कारण वो दर्शनों का अवैध कारोबार चलाने वाले गिरोह की आंखों की किरकिरी बन गए। अजेंद्र ने भविष्य में दर्शन व्यवस्था को बेहत्तर बनाने के लिए बीकेटीसी का अपना सुरक्षा संवर्ग बनाने की पहल की। सुरक्षा संवर्ग का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा। शासन ने सुरक्षा संवर्ग के लिए 57 पदों के सृजन की अनुमति दे दी है। यदि सब कुछ योजनानुसार रहा तो आगामी यात्राकाल में मंदिरों में दर्शन व्यवस्था का जिम्मा बीकेटीसी के सुरक्षाकर्मियों के हाथ में होगी।
अजेंद्र के सुधारवादी कदम कई लोगों को रास नहीं आये। उन्होंने बीकेटीसी की कार्यप्रणाली में पूर्व से चली आ रही नियम विरुद्ध कई परम्पराओं को तोड़ने का प्रयास किया। पूर्व के कई अध्यक्षों के कार्यकाल में बीकेटीसी के सदस्यों को मन माफिक तरीके से कार्य करने की छूट मिली थी। अजेंद्र ने नियमों और अनुशासन की सीमा रेखा खींच दी तो कुछ सदस्यों ने अपने स्वार्थों की पूर्ति नहीं होते देख पूरे समय अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोले रखा। अजेंद्र के विरुद्ध अफवाहों और दुष्प्रचार का एक संगठित अभियान चलाया गया। मगर अजेंद्र ने ऐसे तमाम हथकंडों की परवाह किए बिना अपने कार्यों को अंजाम दिया। बहरहाल, बीकेटीसी अध्यक्ष के रूप में अजेंद्र कुछ लोगों की आंखों की किरकिरी भले बने रहे हों। मगर उनके द्वारा ईमानदारी व निर्भीकता से लिए गए निर्णयों ने उन्हें आम जनता में एक कुशल प्रशासक के रूप में स्थापित किया है।

shivani Rawat

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