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अरकु (आंध्र प्रदेश)। देश में गुणवत्तापूर्ण कॉफी उत्पादन को बढ़ावा देने और आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों को अरकु घाटी में नई गति मिली है। “अरकु कॉफी” को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिससे स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

इसी कड़ी में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की ओर से उत्तराखंड के पत्रकारों के लिए एक विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके तहत मीडिया प्रतिनिधियों को कॉफी बोर्ड अरकु द्वारा संचालित मुसरी गांव स्थित कॉफी नर्सरी का अवलोकन कराया गया। यहां उन्हें कॉफी के पौध तैयार करने की प्रक्रिया, आधुनिक नर्सरी तकनीक और गुणवत्ता मानकों के बारे में जानकारी दी गई। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अरकू घाटी में काफी बोर्ड का गठन किया है।

कॉफी बोर्ड के वरिष्ठ सम्पर्क अधिकारी सामला रमेश ने बताया कि अरकु क्षेत्र में आधुनिक खेती तकनीकों, बेहतर बीज, जैविक खेती और प्रसंस्करण सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ कॉफी की गुणवत्ता सुधारने के लिए वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जा रहा है। कॉफी बोर्ड की कनिष्ठ जन सम्पर्क अधिकारी बीबी के एम लक्ष्मी
केंद्र सरकार की ओर से कॉफी उत्पादकों को वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और ब्रांडिंग सपोर्ट भी प्रदान किया जा रहा है। “अरकु वैली कॉफी” को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के लिए विशेष विपणन रणनीति तैयार की गई है।

स्थानीय आदिवासी किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और उनकी मेहनत को सही पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों से अरकु कॉफी देश की प्रमुख प्रीमियम कॉफी ब्रांड के रूप में उभर सकती है।
कॉफी बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में अरकु क्षेत्र में कॉफी उत्पादन और निर्यात को और बढ़ाने के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।