कोटद्वार : उत्तराखंड के कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद बीते दो दिनों में लगातार बढ़ता चला गया और अब यह मामला सड़क से होते हुए थाने तक पहुंच गया है. शुरुआत में कथित बदसलूकी और विरोध तक सीमित रहा यह विवाद अब पुलिस कार्रवाई, एफआईआर और प्रशासन की सख्ती का कारण बन गया है. हालात की गंभीरता को देखते हुए पौड़ी पुलिस पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है.
जानकारी के अनुसार, पटेल मार्ग पर स्थित एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर आपत्ति जताई गई थी. आरोप है कि इसी दौरान कुछ युवकों ने बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया. इस घटना के विरोध में अगले दिन बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे. दूसरे जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने पहले शहर में जुलूस निकाला और बाद में मालवीय उद्यान में एकत्र होकर प्रदर्शन किया.
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी संबंधित युवक के जिम के बाहर पहुंच गए. स्थिति को बिगड़ते देख पुलिस को मौके पर अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया. पुलिस की तत्परता से किसी बड़ी अप्रिय घटना को टाल लिया गया.
दुकानदार वकील अहमद की तहरीर पर केस दर्ज
यह विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं. दुकानदार वकील अहमद की तहरीर पर दो नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ दुकान का नाम बदलने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है. वहीं, कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट और बयानबाजी को लेकर पुलिस ने सख्त चेतावनी जारी की है.
मोहम्मद दीपक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज
इस पूरे प्रकरण में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को तहरीर सौंपी गई थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है. पुलिस ने मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कारकी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 191(1), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के अनुसार, फिलहाल दर्ज की गई सभी धाराएं जमानती हैं.
पुलिस का प्रयास है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद हो शांत
एसएसपी पौड़ी सर्वेश पवार ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है, उनमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रयास है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद के जरिए विवाद को शांत कराया जाए, ताकि समाज में किसी भी तरह का वैमनस्य न फैले और शांति व्यवस्था बनी रहे.
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