देहरादून। उत्तराखंड में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। देहरादून, हरिद्वार और रुड़की जैसे क्षेत्रों में सामने आए हालिया मामलों ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामून हसन, बबली बेगम और हाल ही में पकड़ी गई सुबेदा जैसे मामलों के बाद यह चिंता और गहरी हो गई है कि आखिर ऐसे कितने घुसपैठिए अभी भी सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर राज्य में रह रहे हैं।
फर्जी दस्तावेज बनवाकर बनाई भारतीय पहचान
जांच में सामने आया है कि घुसपैठिए सबसे पहले खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड बनवाते हैं। इसके लिए वे स्थानीय स्तर पर काम कर रहे कुछ कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या निजी एजेंसियों की मदद लेते हैं। पूछताछ में अधिकतर एजेंसी संचालकों का यही कहना है कि उन्होंने सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म भरे थे और आवेदक अपने दस्तावेज खुद लेकर आए थे।
डेटा गायब, जांच में आ रही परेशानी
उत्तराखंड पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने डेटा की कमी बनकर सामने आ रही है। जिन एजेंसियों के माध्यम से वर्षों पहले आधार या वोटर कार्ड बनाए गए थे, उनका रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं है। कई मामलों में डेटा पुराना होने के कारण नष्ट हो चुका है। वहीं, हाल के मामलों में भी आधार एजेंसियों से समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही, जिससे जांच की रफ्तार धीमी हो गई है।
हर मामले में एक जैसा पैटर्न
पिछले साल सामने आए मामून हसन और बबली बेगम के मामलों में भी फर्जी आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड पाए गए थे। हाल ही में पकड़ी गई सुबेदा के केस में भी यही पैटर्न सामने आया है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह कोई एक-दो मामलों तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
जड़ तक क्यों नहीं पहुंच पा रही पुलिस?
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, पुराने मामलों में रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं और आधार व वोटर आईडी से जुड़ा डेटा समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कई एजेंसियां जिम्मेदारी लेने से बचती नजर आ रही हैं।
घुसपैठिए पहचान बदलकर वर्षों तक सामान्य नागरिक की तरह रहते हैं, जिससे पुलिस अक्सर निचले स्तर तक ही सीमित रह जाती है और नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।फिलहाल, लगातार सामने आ रहे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सिस्टम को और कितना मजबूत करने की जरूरत है।
Post Views: 6
Post navigation
PIONEER EDGE NEWS SERVICE/ Dehradun Former governor of Maharashtra and former chief minister of Uttarakhand,…
चार साल में 30 हजार युवाओं को मिली सरकारी नौकरी देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी…
LPG Gas Cylinder Price Today 18 May 2026: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव…
दूरस्थ इलाकों तक पहुंचेगी त्वरित चिकित्सा सुविधा देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एचडीएफसी बैंक…
भारतीय समाज में सेवा और सामूहिक चेतना हमारी पहचान : प्रो. सुरेखा डंगवाल देहरादून ।…
वर्ष 2026-27 हेतु 74 करोड़ 23 लाख 70 हजार की वार्षिक जिला योजना अनुमोदित चमोली।…