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सावधान! गर्मियों में बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे लोग, उत्तराखंड की 218 कॉलोनियों में भीषण जल संकट के आसार – myuttarakhandnews.com

Attention People will crave for every drop of water in summer, chances of severe water crisis in 218 colonies of Uttarakhand

Latest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून। गर्मियों में इस बार उत्तराखंड की 218 शहरी कॉलोनियों और ग्रामीण बस्तियों में भारी जल संकट के आसार हैं। पानी के संकट से जूझ रहे इन क्षेत्रों का ब्योरा खुद जल संस्थान और जल निगम ने जारी किया है। इस वर्ष सर्दियों में बारिश-बर्फबारी नहीं होने से पेयजल संकट से निपटने को लेकर संबंधित विभागों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। उधर, ठोस वैकल्पिक इंतजाम न होने के चलते जनता के सामने परेशानियां आनी शुरू भी हो गई हैं। ‘हिन्दुस्तान’ ने प्रदेशभर में इस संबंध में पड़ताल की तो कुछ यह स्थिति सामने आई-उत्तराखंड में संभावित पेयजल संकट के लिहाज से पहले 317 कॉलोनियों को चिन्हित किया गया था। बाद में इन आंकड़ों में बदलाव कर जो सूची सामने आई उसमें 218 कॉलोनी शामिल किया गया। उत्तराखंड में ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार को छोड़कर एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां कोई न कोई क्षेत्र पानी के संभावित संकट से जुड़ा न हो। ऐसी संभावित शहरी कॉलोनियों की संख्या 118 है जबकि ग्रामीण बस्तियों की संख्या 100 के करीब है। शहर के भीतर और बाहरी दोनों हिस्सों में पानी की किल्लत की स्थिति पैदा होने लगी है। प्रदेश में कहीं पेयजल लाइनों का विस्तार न होना और कहीं पानी की कमी के कारण, पेयजल का सप्लाई सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।राजधानी देहरादून में भी पानी की परेशानीराजधानी देहरादून में कई कॉलोनियां पेयजल संकट से ग्रस्त हैं। ट्यूबवेलों का डिस्चार्ज कम होने, प्राकृतिक स्रोतों से कम पानी मिलने समेत बिजली की समस्या के कारण पेयजल संकट है। देहरादून शहर के सभी जोन और सभी डिविजनों में पानी के संकट जैसे हालात हैं। जोहड़ी, नाईवाला, सुमननगर, साकेत, आर्यनगर, डीएल रोड, मक्कावाला, कौलागढ़, नालापानी रोड, शांति विहार, ननूरखेड़ा, राजीव कॉलोनी, आम्बेडकर मार्ग, बिंदाल बस्ती, आमवाला समेत अन्य कई क्षेत्रों में सप्लाई बाधित होती है।गढ़वाल में दिक्कतगढ़वाल मंडल में देहरादून के साथ पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी के विभिन्न क्षेत्र भी जल संकट के मुहाने पर खड़े हैं। उत्तरकाशी के बड़कोट क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। यहां चारधाम यात्रा का भी दबाव है। रुद्रप्रयाग के सौंदा, भरदार, तल्लानागपुर, गुप्तकाशी, क्वीलाखाल, चोपता, कुंडादानकोट समेत कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित है। योजना के लिए लाइन बनी है पर पानी नहीं है। पंपिंग योजनाएं मंजूर हुई हैं लेकिन बजट नहीं मिलने से इन पर काम शुरू नहीं हुआ।कुमाऊं में किल्लतकुमाऊं मंडल के तमाम क्षेत्रों में पानी का संकट बना हुआ है। नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत जिलों में सबसे ज्यादा दिक्कत है। हल्द्वानी में शहरी इलाके तक संकट से जूझ रहे हैं। नैनीताल में 17 शहरी व 11 ग्रामीण बस्तियां जल संकट के तहत चिन्हित हुई हैं। हालांकि यहां संकट इससे अधिक है। अल्मोड़ा से लेकर पास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्रोत सूखने से दिक्कत है। पिथौरागढ़ में आठ शहरी व 17 ग्रामीण बस्ती जलसंकट के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।जल संस्थान की मुख्य महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग ने कहा कि गर्मियों में स्रोतों में पानी कम हो जाता है। ट्यूबवेल भी प्रभावित होते हैं। दूसरी ओर पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। हालांकि जनता को टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। जहां बिजली कटौती की दिक्कत है, वहां जेनरेटर का इस्तेमाल कर ट्यूबवेल का संचालन किया जा रहा है।नैनी झील में उभरने लगे डेल्टानैनीझील के किनारों पर चार साल बाद फिर डेल्टा नजर आने लगे हैं। इस बार सर्दियों में बर्फबारी न होने और बादलों के लगातार रूठे रहने से झील का जलस्तर लगातार गिर रहा है। गुरुवार को झील का जलस्तर दो फीट एक इंच पर आ गया। सामान्य तौर पर इन दिनों जलस्तर पांच से छह फीट तक रहता है। वर्ष 2021 के बाद झील का यह सबसे निचला स्तर है। यही हालात रहे तो आने वाले पर्यटन सीजन में स्थानीय लोगों के साथ कारोबारियों को भी बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

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