
देहरादून। अतीत की स्मृति, वर्तमान का उत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत आज श्री स्वयंभू चौबीसी महामंडल विधान का संगीतमय आयोजन इंदौर के विधानाचार्य संदीप जैन सजल तथा भोपाल के संगीतकार केशव और उनकी मंडली द्वारा संपन्न हुआ।
परम पूज्य संस्कार प्रणेता, उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि – “दान और त्याग में अंतर है। दान किसी उद्देश्य व परोपकार के लिए होता है, जबकि त्याग संयम और आत्मबल के लिए। दान से पुण्य बंध होता है, त्याग से धर्म और मोक्ष मार्ग की वृद्धि होती है। धन-संपत्ति की शक्ति नहीं, बल्कि त्याग की शक्ति ही इंसान का वास्तविक मूल्यांकन करती है।”
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया कि त्याग का अर्थ केवल धन-संपत्ति छोड़ना नहीं, बल्कि कषाय, राग-द्वेष और अहंकार का त्याग करना है। यही त्याग आत्मा को बल प्रदान करता है और जीवन को संतोषमय बनाता है।
दोपहर में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महिला जैन मिलन द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। वीरांगना संगीता जैन (अध्यक्ष) और पायल जैन (मंत्री) के संचालन में णमोकार मंत्र के साथ शुरुआत हुई। भक्ति भाव से “भादो की रिमझिम…” जैसे भजनों पर सभी ने झूमकर कीर्तन किया। अंत में पर्युषण महापर्व पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन कर विजेता वीरांगनाओं को योग समिति द्वारा सम्मानित किया गया।
संध्याकालीन बेला में जैन वीरांगना मंच द्वारा धार्मिक तंबोला का आयोजन किया गया, जिसमें 10 धर्म और 12 भावनाओं का समावेश कर रोचक शैली में सभी को सम्मिलित किया गया। कार्यक्रम संयोजक बबिता जैन व सहसंयोजक रश्मि जैन के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में उपस्थित वीरांगनाओं ने पूरे उत्साह के साथ भक्ति का आनंद लिया।
मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि 5 सितंबर को श्री आदिनाथ जैन पंचायती मंदिर माजरा के तत्वावधान में गांधी रोड स्थित जैन भवन में सायं 7:30 बजे एक भव्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
