
देहरादून ज़िले में सेवा प्रदायगी से जुड़े केंद्रों पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में की गई रैपिड जांच में कुछ केंद्रों पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने, दैनिक कार्य दर्ज न करने और अन्य कई गड़बड़ियां सामने आईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने एक केंद्र को तत्काल प्रभाव से बंद कर सील कर दिया, साथ ही स्पष्ट कर दिया कि आदेश मिलने तक वहां कोई सेवा संचालित नहीं होगी।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने ज़िले के सभी सीएससी और जन सेवा केंद्रों पर विशेष चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी केंद्र पर सेवा शुल्क, रिकॉर्डिंग, प्रमाण-पत्र निर्माण या ग्राहक सुविधा से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सीधी कार्रवाई की जाएगी।
बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े दस्तावेज़ तैयार होने के संकेत
देहरादून क्षेत्र में बाहरी नागरिकों—विशेषकर बांग्लादेश मूल के लोगों—के लिए मतदाता पहचान पत्र, आधार और राशन कार्ड बनाने जैसी संवेदनशील शिकायतें पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। इन मामलों में कुछ केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुआ है। आरोप यह भी है कि अनधिकृत शुल्क लेकर आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध करवाए जा रहे थे।
इसी संदर्भ में पिछली कार्रवाई के दौरान सहारनपुर रोड स्थित देवभूमि कॉमन सर्विस सेंटर में प्रशासन की टीम ने चौंकाने वाला खुलासा किया। निरीक्षण के दौरान यहां चुनाव विभाग से जुड़े कागज़ मिले, जबकि इस प्रकार की फाइलें इन केंद्रों पर होना नियमों के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूछताछ पर संचालक दस्तावेज़ों के स्रोत और उद्देश्य के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
स्थिति संदिग्ध पाये जाने पर टीम ने सेंटर को वहीं पर सील कर दिया और संचालन रोक दिया गया।
प्रशासन का साफ संदेश: पारदर्शिता ही पहली शर्त
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवाओं से जुड़े किसी भी केंद्र पर मनमानी, उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान या किसी भी तरह की अपारदर्शिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और लोगों को भरोसेमंद सेवाएं दिलाने के लिए विभाग लगातार सघन जांच जारी रखेगा।
