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देहरादून। उत्तराखंड शासन के कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-01 द्वारा जारी ताजा आदेशों के तहत राज्य में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक पुनर्संरचना की गई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के कई अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से नई तैनाती सौंपी गई है।
जारी आदेश के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत पीसीएस अधिकारी कमलेश मेहता को अब डिप्टी कलेक्टर, टिहरी गढ़वाल के पद पर नियुक्त किया गया है। इससे पूर्व उन्हें 2 दिसंबर 2024 के शासनादेश के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव के पद के सापेक्ष तैनाती दी गई थी, जिसे पुनर्विचार के बाद समाप्त कर दिया गया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि वे वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर नई जिम्मेदारी का तत्काल कार्यभार ग्रहण करें और इसकी सूचना शासन को प्रेषित करें।
अन्य प्रमुख बदलावों में, संजय कुमार (IAS-2014) को निदेशक सेवायोजन के पद से मुक्त किया गया है।
सौरभ गहरवार (IAS-2016) को अपर सचिव उद्योग तथा निदेशक राजकीय मुख्यालय, हल्द्वानी का दायित्व सौंपा गया है।
नरेन्द्र सिंह भंडारी (IAS-2016) को अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन विकास परिषद, देहरादून और निदेशक सेवायोजन बनाया गया है।
विनोद गिरी गोस्वामी (IAS-2017) को अपर सचिव आवास एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रतीक जैन (IAS-2018) को जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग के पद से स्थानांतरित करते हुए उन्हें प्रबंध निदेशक GMVN, मिशन निदेशक जल जीवन मिशन, परियोजना निदेशक नमामि गंगे तथा परियोजना निदेशक KFW परियोजना का दायित्व सौंपा गया है। वहीं, विशाल मिश्रा (IAS-2018) को इन दायित्वों से मुक्त कर जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग नियुक्त किया गया है।
गिरधारी सिंह रावत (PCS) को अपर सचिव अल्पसंख्यक कल्याण के साथ-साथ निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, निदेशक उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद एवं प्रबंध निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुरेश जोशी (सचिवालय सेवा) को अपर सचिव, जनगणना के पद पर नियुक्त किया गया है।
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारी अपने वर्तमान पदभार से अविलंब कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करेंगे तथा अनुपालन रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएंगे।



राज्य सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।