देहरादून | राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के बॉयज हॉस्टल में रैगिंग की दो गंभीर घटनाओं का खुलासा हुआ है। एंटी रैगिंग कमेटी की संस्तुति पर एमबीबीएस 2023 और 2024 बैच के कुल नौ सीनियर छात्रों को हॉस्टल और कक्षाओं से निष्कासित कर दिया गया है। वहीं, दो मुख्य आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
12 जनवरी की घटना: बेल्ट-चप्पलों से पिटाई
पहला मामला 12 जनवरी का है, जिसमें एमबीबीएस 2025 बैच के एक छात्र के साथ सीनियर छात्रों ने बेल्ट और चप्पलों से मारपीट की और उसके बाल कटवाने का दबाव बनाया। छात्र की शिकायत के बाद मामला एंटी रैगिंग कमेटी को सौंपा गया।
एंटी रैगिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को प्राचार्य को सौंपी। प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने छात्र की पिटाई करने वाले दो आरोपियों को पूरे शैक्षणिक सत्र और इंटर्नशिप के दौरान हॉस्टल से निष्कासित, साथ ही दो माह के लिए कक्षाओं से बाहर कर दिया। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
दूसरी घटना: CCTV से पहचाने गए सात छात्र
दूसरे मामले में एक अन्य जूनियर छात्र ने हॉस्टल में सीनियर छात्रों पर रैगिंग का आरोप लगाया था। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सात छात्रों की पहचान की गई। इन सातों को तीन माह के लिए हॉस्टल से और एक माह के लिए कक्षाओं से निष्कासित किया गया है।
डर का माहौल, पूरी कार्रवाई रिकॉर्ड में
कॉलेज सूत्रों के अनुसार, रैगिंग की इन घटनाओं से जूनियर छात्रों में भय का माहौल है। एक मामले में सीनियर छात्रों ने न सिर्फ खुद मारपीट की, बल्कि एक छात्र को धमकाकर दूसरे जूनियर से भी पिटाई करवाई।एंटी रैगिंग कमेटी ने पूरी कार्रवाई की वीडियोरिकॉर्डिंग और दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं।
2016 में स्थापित कॉलेज की सबसे बड़ी कार्रवाई
वर्ष 2016 में स्थापित दून मेडिकल कॉलेज में यह अब तक की सबसे बड़ी रैगिंग घटना और सबसे कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इससे पहले 2023 में रैगिंग के दो मामलों में दो छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) का नोटिस
मामले ने तूल पकड़ने पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है। नोटिस में एक घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पूछा गया है कि रैगिंग के मामले में क्या कार्रवाई की गई।
सूत्रों के अनुसार, एनएमसी ने कार्रवाई में देरी, समय पर सूचना न देने और उठाए गए कदमों को लेकर सवाल खड़े किए हैं, जिससे कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
सात दिन में हुई कार्रवाई पर सवाल
रैगिंग का मामला सात दिन तक खिंचने पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि घटना 12 जनवरी की थी, इसकी शिकायत 13 जनवरी को की गई और अंतिम कार्रवाई 19 जनवरी को।
सूत्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन के भीतर समन्वय की कमी के कारण कार्रवाई में देरी हुई। मामला बढ़ने पर रविवार को चीफ वार्डन स्तर से दो छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया गया, जबकि सोमवार को कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद प्राचार्य स्तर पर आदेश जारी होने में भी देर शाम तक इंतजार करना पड़ा।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि भविष्य में रैगिंग के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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