

देहरादून; देहरादून में 3 जनवरी 2026 को चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने शनिवार को स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई वीआईपी नहीं था. हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शेखर सुयाल ने संवाददाताओं को बताया कि आरोपियों के चैट और अंकिता के मित्र से पूछताछ में जिस ‘वीआईपी’ का नाम लिया गया था, वह नोएडा का रहने वाला धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान था और वह कोई भी वीआईपी नहीं है.
उन्होंने कहा, जांच के दौरान पुलिस धर्मेंद्र तक पहुंची और उससे पूछताछ में पता चला की अंकिता की हत्या से दो दिन पहले वह क्षेत्र में किसी काम से आया था और वनंत्रा रिजॉर्ट में खाना खाने के लिए कुछ देर रूका था. पुलिस अधीक्षक, सुयाल ने बताया कि रिजॉर्ट के रिकॉर्ड और कर्मचारियों से पूछताछ में इस बात पुष्टि की गई.
सनावर का आरोप- हत्याकांड में शामिल भाजपा का नेताप्रदेश के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर का हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें अंकिता हत्याकांड में एक वीआईपी को लेकर जिक्र था. वहीं सनावर का राठौर के साथ उनकी कथित बातचीत का ऑडियो और वीडियो भी वायरल हुआ था. जिसने उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है. सनावर ने आरोप लगाया है कि अंकिता हत्याकांड में जो वीआईपी शामिल है. वे भाजपा का गटटू नाम का एक नेता है. उन्होंने गटटू का नाम जिक्र एक अन्य वीडियो में किया है. जिसके बाद सुयाल ने कहा सनावर के दावे को मद्देनजर रखते हुए, यह बयान काफी अहम है.
कांग्रेस ने की सीबीआई से जांच की मांगइस खुलासे के बाद कांग्रेस इस पूरे प्रकरण की जांच उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की मांग कर रही है. साल 2022 में हुए अंकिता हत्याकांड के समय सुयाल, पौड़ी जिले के अपर पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात थे. वहीं बाद में सुयाल इस हत्याकांड की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के भी सदस्य रहे थे.
