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2027 से पहले CM धामी पर BJP आलाकमान का भरोसा? इस बात से मिले संकेत – myuttarakhandnews.com

देहरादून ; उत्तराखंड की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अपना भरोसा जताते हुए भविष्य की तस्वीर साफ कर दी है. देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सीएम धामी की जिस तरह खुले मंच से सराहना की, उसने सियासी गलियारों में यह संदेश दे दिया है कि अगला चुनाव धामी के चेहरे और उनके विकास मॉडल पर ही लड़ा जाएगा.
नड्डा बोले- ‘दिख रही है विकास की नई ऊंचाई’देहरादून पहुंचे जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में सीएम धामी की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा, “जब भी मैं उत्तराखंड आता हूं, मुझे यह राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छूता हुआ दिखाई देता है.” नड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी और उनकी टीम दिन-रात जनता की सेवा में जुटी है और उनकी मेहनत धरातल पर नजर आ रही है. केंद्रीय नेतृत्व का यह बयान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि धामी की प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक कद की स्वीकृति मानी जा रही है.
कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं का बदला स्वरूपनड्डा ने विशेष रूप से राज्य में कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख किया. चारधाम परियोजना से लेकर सीमांत क्षेत्रों तक सड़कों का जाल बिछाने, रेल नेटवर्क और हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के प्रयासों को उन्होंने सराहा. नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और जिला अस्पतालों के आधुनिकीकरण को केंद्र और राज्य के ‘डबल इंजन’ की सफलता बताया. डिजिटल सुविधाओं के विस्तार और स्कूलों के उन्नयन को बड़ी उपलब्धि माना गया.
2027 के लिए संगठन को ‘ग्रीन सिग्नल’राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नड्डा का यह बयान संगठन के भीतर चल रही किसी भी तरह की अटकलों पर विराम लगाने के लिए काफी है. बीजेपी ने यह संकेत दे दिया है कि वह ‘युवा नेतृत्व और तेज निर्णय क्षमता’ वाले धामी के साथ ही 2027 के मैदान में उतरेगी. इस तारीफ को पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने और एकजुटता का संदेश देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
कानून-व्यवस्था, निवेश और धार्मिक पर्यटन पर सरकार के कड़े और स्पष्ट रुख ने भी केंद्रीय नेतृत्व का विश्वास जीता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष बीजेपी की इस ‘विकास और विश्वास’ की रणनीति का क्या काट ढूंढता है.

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