देहरादून। गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र भले ही नौ दिन बाद नौ मार्च से शुरू होना है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल अभी से चल पड़ा है। सत्र के पहले ही दिन नौ मार्च को बजट पेश करने के प्रस्तावित कार्यक्रम ने सियासी पारे में उछाल ला दिया है। सरकार के इस कदम को मुख्य विपक्ष कांग्रेस पर विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति में आने के लिए दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के दोनों सदस्यों ने गत वर्ष गैरसैंण में हुए सत्र के दौरान कार्यमंत्रणा समिति से त्यागपत्र दे दिया था। कांग्रेस ने सरकार पर अब संसदीय परंपराओं और विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली का परित्याग करने और विपक्ष के प्रश्नों से बचने का आरोप लगाया है। विधानसभा सचिवालय की ओर से गुरुवार को सभी विधायकों को पत्र भेजा गया, जिसमें बजट सत्र के संशोधित कार्यक्रम का उल्लेख है।
चूंकि, यह इस वर्ष का पहला सत्र है तो इसकी शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी है। पत्र में बताया गया है कि नौ मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण होगा और इसी दिन सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-27 का बजट पेश किया जाएगा। राज्य के संसदीय इतिहास में यह पहली बार होगा, जब ऐसा होगा। परंपरा के अनुसार वर्ष के पहले सत्र में पहले दिन केवल राज्यपाल का ही अभिभाषण होता है।
विधायकों को भेजे गए इसी पत्र ने राजनीतिक वातावरण को गर्मा दिया है। असल में गैरसैंण में पिछले वर्ष 19 व 20 अगस्त को हुए सत्र के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया था। कांग्रेस विधायकों ने सभामंडप में ही रात बिताई थी। तब कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और विधायक प्रीतम सिंह ने विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति से त्यागपत्र दे दिया था। तब से वह इससे दूरी बनाए हुए है। त्यागपत्र अभी तक स्वीकार नहीं हुए हैं।
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