सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया आदि गौरव महोत्सव 2024 का उद्घाटन – my uttarakhand news

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देहरादून, देहरादून के ओएनजीसी स्टेडियम में आदि गौरव महोत्सव 2024 के भव्य उद्घाटन के अवसर पर उत्तराखंड के आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विरासत जीवंत हो उठी। राज्य जनजातीय शोध संस्थान (टीआरआई) उत्तराखंड द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया और अध्यक्षता कैंट विधायक सविता कपूर ने की।‘जनजातीय कल्याण: विजन से मिशन तक’ थीम के साथ, यह महोत्सव आदिवासी संस्कृति का जश्न मनाते हुए आदिवासी समुदायों के सतत विकास और सशक्तिकरण पर जोर देता है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आयोजन पर गर्व और उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “मैं इस भव्य महोत्सव में भाग लेने आए देश भर के कलाकारों का स्वागत करते हुए प्रसन्न हूँ। इस तरह के आयोजन आदिवासी समुदायों को अपनी समृद्ध संस्कृति और प्रतिभा दिखाने के लिए एक अविश्वसनीय मंच प्रदान करते हैं, साथ ही गैर-आदिवासी लोगों को अपनी विरासत के बारे में जानने और उसकी सराहना करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
आज यहाँ उपस्थित होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है, और मैं हर साल इस कार्यक्रम में शामिल होने का हर संभव प्रयास करूँगा। इस तरह के आयोजन आदिवासी समुदायों के अमूल्य योगदान का जश्न मनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं। बिरसा मुंडा की विरासत वास्तव में अद्वितीय है। वे न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक उल्लेखनीय समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए हमारे संघर्ष को एक नई दिशा दी। उनकी 150वीं जयंती पर, मैं सभी को हार्दिक बधाई देता हूँ।मेरा मानना है कि एक पेड़, चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अपनी मजबूत जड़ों के कारण ही ऊँचा खड़ा रहता है। इसी तरह, हमारे आदिवासी समुदाय हमारे राष्ट्र की मजबूत जड़ें हैं, और उनका कल्याण हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने एक क्रांतिकारी बदलाव देखा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चुनाव आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए हमारी सरकार के समर्पण का प्रमाण है, एक प्रतिबद्धता जिसे पिछली सरकारों ने कभी पूरा नहीं किया। उत्तराखंड में, हमने आदिवासी कल्याण के लिए बजट को तीन गुना बढ़ाया है और आदिवासी समुदायों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के नेटवर्क का 21 गुना विस्तार किया है। हमारी सरकार हर क्षेत्र में आदिवासी समुदायों को समर्थन और सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए, मुझे हमारे आदिवासी समुदायों की जीवंत संस्कृति का जश्न मनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए हर साल एक राज्य आदिवासी महोत्सव के आयोजन की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। इसके साथ ही, हम आदिवासी युवाओं के बीच एथलेटिक प्रतिभा को बढ़ावा देने और खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए एक वार्षिक राज्य आदिवासी खेल महोत्सव भी आयोजित करेंगे। इसके अतिरिक्त, हम आदिवासी छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक और आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए आदिवासी संस्थानों में छात्रावासों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित 128 आदर्श गांवों के विकास के साथ ये पहल हमारी आदिवासी आबादी के समग्र विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
उन्होंने घोषणा करी की, “हम आदिवासी युवाओं में नवाचार और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसे प्राप्त करने के लिए, हमारी सरकार उत्तराखंड में एक वार्षिक जनजातीय विज्ञान महोत्सव आयोजित करेगी, जिसमें आदिवासी छात्रों को वैज्ञानिक क्षेत्रों में खोज करने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके आयोजन हेतु टीआरआई को 1 करोड़ की धनराशि दी जाएगी। उत्तराखंड में हमारी सरकार आदिवासी समुदायों की बेहतरी के लिए काम करने के अपने संकल्प में दृढ़ है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें वह मान्यता और समर्थन मिले जिसके वे हकदार हैं।”कैंट विधायक सविता कपूर ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “ऐसे उत्सव विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक साथ लाते हैं, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का एक मंच मिलता है। वे एक सुंदर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं जहाँ परंपराएँ, व्यंजन और विरासत साझा की जाती हैं, जिससे विविधता में एकता को बढ़ावा मिलता है।”जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर और जनजातीय गुरु बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में, यह प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक जनता के लिए खुली है, जिसमें आदिवासी कलाकृतियों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रदर्शनों की एक श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। शाम को 6 बजे से रात 10 बजे तक विभिन्न आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, जो जनता के लिए निःशुल्क प्रवेश के साथ खुले रहेंगे।उद्घाटन के दिन, सैकड़ों आगंतुकों ने लगायी गई कई स्टॉलों का दौरा किया। इस अवसर पर, उत्तराखंड के कई आदिवासी सांस्कृतिक समूहों, जिनमें जौनसारी, भोटिया, बुक्सा, थारू और राजी शामिल थे, ने शाम भर दर्शकों को मनमोहक प्रदर्शन से मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिन का एक प्रमुख आकर्षण उत्तराखंड के प्रशंसित लोक गायकों, इंदर आर्या और रेशमा शाह द्वारा आकर्षक संगीत प्रस्तुति थी। इस जोड़ी ने ‘गुलाबी शरारा’ व ‘मेरो लहंगे’ तथा ‘गलिया बिछुला’ व ‘फुरकी निर्मला’ सहित प्रतिष्ठित लोकगीतों से दर्शकों का मन मोह लिया।
इस आयोजन के बारे में बात करते हुए, टीआरआई उत्तराखंड के निदेशक, एस एस टोलिया ने कहा, “आदि गौरव महोत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि आदिवासी पहचान को बढ़ावा देने और संरक्षित करने का एक अद्वितीय कार्यक्रम है। यह शहरवासियों और आदिवासी जीवन शैली के बीच के अंतर को खत्म करने तथा उनके योगदान के लिए प्रशंसा को बढ़ावा देता है। मुख्यमंत्री द्वारा इस आयोजन को प्रतिवर्ष आयोजित करने की घोषणा के साथ, हमारा लक्ष्य इसे हर वर्ष और भी भव्य बनाना है, ताकि हमारे आदिवासी समुदायों को बढ़ावा देने और उनके उत्थान के लिए अधिक अवसर प्रदान किए जा सकें।”
टीआरआई उत्तराखंड के समन्वयक राजीव कुमार सोलंकी, टीआरआई उत्तराखंड के अतिरिक्त निदेशक योगेंद्र रावत और उत्तराखंड के समाज कल्याण सचिव नीरज खेरवाल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
अगले दो दिनों में, प्रदर्शनी में माया उपाध्याय, नरेश बादशाह, विवेक नौटियाल, किशन महिपाल और सनी दयाल जैसे प्रसिद्ध लोक कलाकार शामिल होंगे, जो आदि गौरव महोत्सव 2024 की सांस्कृतिक भव्यता में चार चांद लगाने के लिए तैयार हैं।
यह कार्यक्रम 17 नवंबर तक चलेगा, जो जनता को उत्तराखंड की आदिवासी संस्कृति की समृद्धि को जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।

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