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मसूरी में बोर्डिंग स्कूल परिसर की मजार पर विवाद, वन विभाग ने भेजा नोटिस – myuttarakhandnews.com

मसूरी | मसूरी के टिहरी बाईपास रोड स्थित वाइनबर्ग एलन स्कूल (Wineberg Allen School) के बोर्डिंग कैंपस में जंगल के बीच बनी एक मजार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मजार के आसपास पक्के निर्माण और सड़क बनाए जाने के विरोध के बाद वन विभाग ने गुरुवार को स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।
वन विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस में स्कूल से जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि मजार का निर्माण कब हुआ और इसका निर्माण किसके द्वारा कराया गया।
जंगल की जमीन पर कब्जे का आरोप
बुधवार को कुछ स्थानीय लोगों ने स्कूल परिसर में पहुंचकर मजार के निर्माण का विरोध किया था। उनका आरोप है कि जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा कर मजार बनाई गई है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच की।जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर मजार बनी है, वह प्राइवेट फॉरेस्ट की श्रेणी में आती है और वाइनबर्ग एलन स्कूल के स्वामित्व में है। इसके बाद वन विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
वन विभाग का क्या कहना है
डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि मजार स्कूल की जमीन पर स्थित है। इसलिए स्कूल प्रबंधन से जमीन के मालिकाना हक और मजार के निर्माण से संबंधित जानकारी मांगी गई है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
वाइनबर्ग एलन स्कूल के बरसर ए.एन. चौहान ने कहा कि मजार स्कूल के अस्तित्व में आने से पहले से वहां बनी हुई है। इसके निर्माण या संचालन में स्कूल की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने बताया कि मजार स्कूल की ही जमीन पर है और इसे हटाने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली।स्कूल प्रबंधन का कहना है कि मजार हटाने को लेकर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
1980 से मसूरी में निर्माण पर रोक
गौरतलब है कि मसूरी में वर्ष 1980 से निर्माण पर प्रतिबंध लागू है। ऐसे में यदि यह मजार या इसके आसपास का निर्माण 1980 के बाद का पाया जाता है, तो उसे अवैध मानते हुए ध्वस्त किया जा सकता है।
वन विभाग को दिया गया लिखित जवाब
स्कूल की ओर से वन विभाग को दिए गए लिखित जवाब में कहा गया है कि यह मजार उनकी निजी भूमि पर स्थित है और करीब 50 वर्षों से वहां मौजूद है। स्कूल ने यह भी कहा है कि मजार सभी वर्गों, धर्मों और जातियों की आस्था से जुड़ी हुई है।
अब वन विभाग स्कूल के जवाब और दस्तावेजों के आधार पर यह तय करेगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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