उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार—सतर्कता समिति ने आय से अधिक संपत्ति के मामलों में तीन अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है। लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य जयदेव सिंह, कर्मकार बोर्ड व श्रम विभाग के कर्मचारी नवाब सिंह, और उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक देशराज खत्री के खिलाफ अब आधिकारिक तौर पर मुकदमा दर्ज होगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सतर्कता विभाग की विस्तृत रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिसके बाद कार्रवाई को हरी झंडी दी गई। सतर्कता सचिव ने साफ शब्दों में कहा—“ये मामले गंभीर हैं, विजिलेंस को तुरंत FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सतर्कता सचिव शैलेश बगौली ने तीन मामलों में केस दर्ज करने के आदेश जारी किए।
दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को मजबूत करते हुए आय से अधिक संपत्ति के तीन मामलों में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य सतर्कता समिति की हालिया बैठक में तीन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्णय लिया गया, जिन पर अज्ञात स्रोतों से संपत्ति इकट्ठा करने के गंभीर आरोप हैं।
इस बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़ी हर शिकायत की गहराई से जांच होनी चाहिए और कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। अधिकारियों के बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद सतर्कता विभाग ने रिपोर्ट को समिति के सामने प्रस्तुत किया।
इन तीन अधिकारियों पर होगा मुकदमा दर्ज
जयदेव सिंह – उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य
नवाब सिंह – कर्मकार बोर्ड के प्रशासनिक कार्यों से जुड़े श्रम विभाग के कर्मचारी
देशराज खत्री – उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक
सतर्कता विभाग की जांच में पाया गया कि इन तीनों अधिकारियों के पास उनकी ज्ञात आय से कई गुना अधिक संपत्ति मौजूद है। कई अचल संपत्ति, संदिग्ध बैंक लेनदेन और घोषित आय से मेल न खाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई की सिफारिश की थी।
वहीं विभाग की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति की शिकायत दर्ज थी, लेकिन जांच में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बड़ा फैसला
मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी चार मामलों की गहन समीक्षा की गई। विजिलेंस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, बैंक विवरण और संपत्ति मूल्यांकन रिपोर्टों को विस्तार से सुना गया।
सतर्कता सचिव शैलेश बगौली ने तीन मामलों में केस दर्ज किए जाने की मंजूरी के आदेश जारी किए।
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