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उत्तराखंड में 19.79 लाख वोटरों पर संकट, BLO मैपिंग नहीं हुई तो कट जाएगा वोट – पर्वतजन

देहरादून।
उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले चल रही बीएलओ मैपिंग प्रक्रिया लाखों मतदाताओं के लिए खतरे की घंटी बन गई है। प्रदेश में कुल 84.42 लाख मतदाताओं में से अब तक केवल 64.63 लाख की ही बीएलओ मैपिंग पूरी हो सकी है, जबकि 19.79 लाख मतदाता अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। यदि इन मतदाताओं ने समय रहते मैपिंग नहीं करवाई, तो उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा एसआईआर से पहले प्री-एसआईआर गतिविधियों के तहत यह मैपिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान और सत्यापन करना है, जिनके या जिनके परिवार के नाम वर्ष 2003 की उत्तराखंड अथवा अन्य राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज थे।
 
76 प्रतिशत कार्य पूरा, 24 प्रतिशत अभी भी बाहर
 
चुनाव आयोग के लगातार प्रयासों के बावजूद अब तक प्रदेश में केवल 76 प्रतिशत बीएलओ मैपिंग ही हो पाई है। शेष 24 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो सका या जिन्होंने अब तक प्रक्रिया में भाग नहीं लिया।
 
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, उन्हें एसआईआर के दौरान किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी और केवल फॉर्म भरना होगा। वहीं जिनकी मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। ऐसा न करने पर पहले नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब न मिलने पर मतदाता सूची से नाम हटाया जा सकता है।
 
जिलों में स्थिति असमान
 
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून जैसे बड़े जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता अभी भी मैपिंग से बाहर हैं।
हरिद्वार में 3.06 लाख, नैनीताल में 2.14 लाख और देहरादून में 5.24 लाख मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग अब तक नहीं हो पाई है। पहाड़ी जिलों में भी हजारों मतदाता इस प्रक्रिया से दूर हैं, जिससे भविष्य में मतदाता सूची पर बड़ा असर पड़ सकता है।
 
पलायन और बाहरी वोटर कार्ड बड़ी वजह
 
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, पलायन कर चुके लोग, दूसरे राज्यों में बने वोटर कार्ड, या परिवार के किसी सदस्य द्वारा प्रक्रिया में रुचि न लेने के कारण बड़ी संख्या में मतदाता मैपिंग से बाहर रह गए हैं। ऐसे मतदाता जो मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी हैं लेकिन उनका वोट अन्य राज्यों में दर्ज है, वे सबसे अधिक जोखिम में हैं।
 
समय रहते कदम जरूरी
 
चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के बीएलओ से संपर्क कर जल्द से जल्द मैपिंग प्रक्रिया पूरी करें। बाहर रहने वाले मतदाता भी अपने परिवार के माध्यम से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराकर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
 
लोकतंत्र में मतदान अधिकार सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है। यदि समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो लाखों मतदाता अपने इस अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

Sapna Rani

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